जाकिर नाईक पर पाबंदी, तो RSS पर रोक क्यों नहीं: मोलाना आमिर रशादी

Nov 04, 2016
जाकिर नाईक पर पाबंदी, तो RSS पर रोक क्यों नहीं: मोलाना आमिर रशादी

डॉक्टर जाकिर नाईक के साथ हो रही राजनीति पर राष्ट्रीय उलमा कोंसिल के नेशनल प्रेसिडेंट मोलाना आमिर रशादी ने उर्दू अख़बार ‘इंक़लाब’ के पत्रकार से फोन पर अपना विरोध जताते हुए कहा कि डॉक्टर जाकिर नाईक पर इंडियन मिडिया का हमला सिर्फ एक संस्था पर नहीं बल्कि डॉक्टर जाकिर नायक की इस्लामी पहचान पर है। उनका कहना है की जाकिर नाईक बहुत से बयान दिए है। उनके बयान को आतंकवाद से जोड़ना और उन्हें आतंकवाद को बढ़ावा देना सरासर गलत है। इस तरह की गन्दी राजनीति पर कड़ी निंदा होनी चाहिए। पिछले दस सालों से पीस टीवी चैनल चल है उस पर बहुत सारे बयान दिए है। तब तो किसी को ऐतराज नहीं हुआ। लेकिन अचानक बंगलादेश के आतंकवादी हमले में शामिल एक आतंकवादी द्वारा शेयर की गई फेसबुक पोस्ट को मुद्दा बना कर चैनल के खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही करने के साथ उनके चेनल को बैन करने की बात की जा रही है। जिस इंसान के सोशल मिडिया पर इतने सारे फॉलोवर्स है अगर कोई अनजान सख्स उस बयान को शेयर कर दे तो क्या उस अनजान सख्स से डॉक्टर जाकिर नाईक का ताल्लुक खोजा जायेगा।

सरकार को तो श्रद्धा कपूर को गिरफ्तार करना चाहिए जो आतंकवादी से मिल चुकी है। डॉक्टर जाकिर नाईक पर इस्लाम के नाम से नफरत फ़ैलाने का जो आरोप लगाते है। वो साक्षी महाराज, साध्वी प्राची, प्रज्ञा ठाकुर, परवीन तोगड़िया और मुस्लिम औरतों से बलात्कार करने की बात कहते है। आदित्यनाथ योगी का जहर उगलने वाला बयान नजर अंदाज क्यों कर देते है उन पर बैन क्यों नहीं लगाया जाता। अगर किसी को फालोअप की सजा दी जा सकती है तो फिर राजनाथ सिंह और शिवराज चौहान को क्यूँ सज़ा दी जानी चाहिए जो लोग आतंक के मुजरिम साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर से मिलने के लिए जेल जाते हैं, अगर डॉक्टर जाकिर नाईक पर रोक लगाई जा सकती है तो RSS पर क्यूँ नहीं लगाई जा रही है।

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