योगी के शहर में AIMIM के विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में नज़र आये चारमीनार के विधायक पाशा क़ादरी

Jul 20, 2016

गोरखपुर. आल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लेमीन यानी एआईएमआईएम का दूसरा जिला कार्यकर्ता सम्मेलन सोमवार 18 जुलाई को अपराह्न 12 बजे इलाहीबाग स्थित ताज पैलेस में हुआ. जिसमें दस हजार कार्यकर्ताओं को जुटाने का लक्ष्य रखा गया था. गोरखपुर ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र में आयोजित इस सम्मेलन में कई दलों की नजर टिकी हुई हैं. वजह मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है दूसरा एआईएमआईएम ने उप्र विधानसभा चुनाव के लिए यहीं से सबसे पहला प्रत्याशी मिर्ज़ा दिलशाद बेग के रुप में खड़ा किया हैं. कार्यकर्ताओं की उपस्थिति से पार्टी के जनाधार का आकलन भी हो जायेगा. इस क्षेत्र में मुस्लिम, निषाद व यादव वोट निर्णायक की भूमिका में रहते है बशर्तें बटे ना.

सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली महुली शामिल होंगे. वह दूसरी बार सम्मेलन को संबोधित करेंगे.

वहीं विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय महासचिव व एमएलए चारमीनार, हैदराबाद सैयद अहमद पाशा कादरी व वरिष्ठ कार्यकर्त्ता हैदराबाद वजाहतुल्लाह खान होंगे.

विवादित बयानों में रहने वाले विधायक अकबरूद्दनी ओवैसी व सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी की सांसद योगी आदित्यनाथ के गढ़ में बुनियाद 16 दिसम्बर 2014 को ही पड़ चुकी थी.

जब मारवाड़ इण्टर कालेज के पास स्थित एसपी पब्लिक स्कूल में जिला स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन हुआ. मुख्य अतिथि के तौर पर पार्टी के प्रदेश शौकत अली ने ही शिरकत की थी. बिना किसी प्रचार प्रसार के हजारों की भीड़ जुट गयी थी.

जिले में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गतिविधियां 6 दिसम्बर 2014 को बाबरी मस्जिद के पुननिर्माण को लेकर डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपने के साथ शुरु कर दी थी. आक्रमक रूख व विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रहने वाली इस पार्टी की इस जिले में दस्तक महत्वपूर्ण मानी जा रही थी. क्योंकि बीजेपी के फायर ब्रांड नेता का यह गढ़ है. जाहिर है एआईएमआईएम का विस्तार हुआ तो टकराहट बढ़नी लाजिमी थी. हुआ भी सांसद असदुद्दीन के पूर्वांचल दौरे के मौके पर टकराहट देखने को मिली भी.

खैर यह पार्टी अल्पसंख्यकों के एक खास तबके को साथ लेकर चलती है. सदस्यता अभियान में मुस्लिम तबका बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहा है. ओवैसी बंधुओं की लोकप्रियता किसी से छुपी नहीं है. पीस पार्टी की गिरती लोकप्रियता का फायदा इस पार्टी को जरूर मिलता नजर आ रहा है. महाराष्ट्रा में पार्टी ने दमदार प्रदर्शन किया अब उसका लक्ष्य उप्र विधान सभा चुनाव है. मुसलमानों के सपोर्ट के बल पर लोगों को चकित कर सकती है. पार्टी की शाखें मजबूत होने से सपा, बसपा कांग्रेस को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है. देखते है पार्टी कितनी दूर जाती है. लेकिन मुस्लिम समीज में हलचल शुरू हो चुकी है.

1992 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी पार्टी ने 6 दिसम्बर को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा और बाबरी मस्जिद पुननिर्माण की मांग की. बीजेपी के फायर ब्रांड नेता महंत योगी आदित्यनाथ की हिन्दूत्ववादी छवि व ओवैसी बंधुओं की मुस्लिम हितैषी छवि का टकराव लाजिमी रहेगा. एआईएमआईएम की वजह से सपा, बसपा, कांग्रेस में थोड़ी बेचैनी लाजिमी है. मुस्लिम वेट जो प्रभावित हो सकते है जनाब..सपा, बसपा व कांग्रेस का सबसे बड़ा सहारा मुस्लिम वोटर हैं.

58 सालों तक हैदराबाद में सियासत का सिक्का चलाने वाली यह पार्टी महाराष्ट्र में चैकानें वाले परिणाम दे चुकी हैं. ओवैसी बंधुओं की मुस्लिमों में लोकप्रियता किसी से छुपी नहीं है. तल्ख लहजे में अपनी बातें कहना. हर बात को खुलकर बोलना इस पार्टी के नेताओं का मशगला रहा है. हैदराबाद में जन्मी यह पार्टी मुस्लिम हितों का दावा करने वाले अन्य दलों पर भारी हो पड़ सकती है. पार्टी का लक्ष्य उप्र विधान सभा चुनाव पर है. पार्टी के नेताओं ने अपने संदेश से दर्शा दिया है कि पार्टी पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी.

जानिए क्या कहा था प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने गोरखपुर में अपने पहले संबोधन में ।

हमें अपने इख्तेलाफात को दूर करना चाहिए. हम मुल्क से गंगा जमुनी तहजीब को मिटने नहीं देंगे. हमारे नेता असदुद्दीन कहते है कि हम सेकुलर दलों का नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते. लेकिन जब सपा, बसपा, कांग्रेस जो मुसलमानों के हितैषी होने के दावा करने वाली पार्टियां कुछ नहीं कर पाती. बीजेपी से शिकस्त खाती है. तब एआईएमआईएम को सियासत के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाने पड़ते है. इसलिए हमनें उप्र के विधानसभा चुनाव में मजबूती से चुनाव लड़ने का अहद किया है. सच्चर कमेेटी की रिपोर्ट कहती है। हमें मजदूर किसने बनाया? सपा, बसपा, कांग्रेस में काम करने वालों से पूछना चाहता हूं मुसलमानों के हालात का जिम्मेदार कौन है? इसका जवाब यह है कि इसके जिम्मेदार हम खुद है. वजह यह है कि हमनें इन दलों और उसमें काम करने वालों को पहचाना नहीं है.सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस पार्टी ने किया.बीजेपी से मुसलमानों को कोई उम्मीद तो है ही नहीं.

60 साल तक कांगेस के लोगों ने हुकूमत की. मस्जिद, कब्रिस्तान, वक्फ समपत्तियां सब बर्बाद हुई. बाबरी मस्जिद की असल जिम्मेदार कांग्रेस ही है. मौजूदा प्रदेश सरकार भी कम जिम्मेदार नहीं है. आरएसएस, बजरंग दल का खुली छुट मिली हुई है. चौरासी परिक्रमा के दौरान सपा मुखिया अशोक सिंघल से घंटों बातें करते है.दरअसल सब मिले हुये है. क्या मुजफ्फरनगर में दंगा एआईएमआईएम ने करवाया. बाबरी मस्जिद के बाद विवाद में क्या एआईएमआईएम शामिल थी. बिल्कुल नहीं.इसकी जिम्मेदार सपा, बसपा व कांग्रेस बराबर की भगीदार रही. उन्हें डर है कि एआईएमआईएम के दीवानें निकल चुके है. एआईएमआईएम मुसलमानों को मजबूत कयादत दे रही हैं.

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>