योगी सरकार के आते ही लोग बेरोजगार हो गए, 2 माह में पुरे उप्र के हालात बिगड़े..

May 21, 2017
योगी सरकार के आते ही लोग बेरोजगार हो गए, 2 माह में पुरे उप्र के हालात बिगड़े..

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के शनिवार को दो माह पूरे होने पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने सूबे की बिगड़ी कानून व्यवस्था पर सरकार को घेरते हुए कहा कि पहले दो माह में सब कुछ ठीक करने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री योगी अब इसके लिए एक वर्ष का समय मांग रहे हैं। यही नहीं बिगड़े हालातों के लिए विपक्ष पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने एक बयान में कहा, “उत्तर प्रदेश की आधी आबादी-दलितों, महिलाओं अल्पसंख्यकों और व्यापारियों का बड़ा भाग आज युद्ध जैसे हालातों का सामना कर रहा है। जो कल तक हाथ जोड़ कर वोट की गुहार लगा रहे थे, वे ही आज हथियार लेकर उन पर हमले कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “सत्ता में आते ही योगी सरकार ने मीटबंदी का जो तुगलकी फरमान जारी किया, उससे लाखों लोग बेरोजगार हो गए। फिर योगी सरकार ने खनन पर रोक लगा दी। इसका नतीजा यह निकला कि बालू, बजरी और गिट्टी-मिट्टी के अभाव में उत्तर प्रदेश का समूचा निर्माण उद्योग ठप होकर रह गया और इस कार्य में लगे लगभग एक करोड़ मजदूर, ठेकेदार और व्यापारी बेरोजगार हो गए।”

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भाकपा नेता ने एंटी रोमियो अभियान पर कहा कि योगी सरकार ने एंटी रोमियो अभियान चलाकर युवाओं को निशाना बनाया और पुलिस-प्रशासन के अलावा बजरंग दल ने युवक-युवतियों की पिटाई की। युवाओं में एक अजीब सा भय व्याप्त है।

उन्होंने कहा, “सहारनपुर, शामली, संभल और मेरठ में आजकल जो कुछ घट रहा है वह बेहद गंभीर है। इससे दलितों अल्पसंख्यकों का सरकार से विश्वास उठ गया है। दुष्कर्म और दुष्कर्म के बाद हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। राजधानी लखनऊ तक में ऐसी दर्जन भर घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं अकेले ब्रज क्षेत्र में कल (शुक्रवार) तक 104 लूट और 76 हत्याओं की घटनाएं अंजाम दी जा चुकी है। आगरा में 21 लूट, 13 हत्याएं, फीरोजाबाद में 11 लूट, 6 हत्याएं, कासगंज में 10 लूट, 11 हत्याएं, मैनपुरी में 14 लूट, 8 हत्याएं, मथुरा में 17 लूट और नौ हत्याएं, एटा में 8 लूट और 10 हत्याएं, अलीगढ़ में 12 लूट, 10 हत्याएं, जबकि हाथरस में 10 लूट और 9 हत्याएं हो चुकी हैं। अन्य अपराधों के आंकड़े भी कम नहीं हैं।”

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गिरीश ने कहा, “समूचे उत्तर प्रदेश के आंकड़ों का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री जी अपराधों के आंकड़े देने से कतरा रहे हैं। इसके अलावा इस अवधि में अल्पसंख्यकों के आस्थास्थलों पर 220 हमले हुए हैं जबकि 180 छोटी-बड़ी सांप्रदायिक वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है। जगह-जगह भाजपा के नेता पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों तक पर हमले कर रहे हैं। योगीजी की कथित चेतावनियों का उन पर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है।”

सपा मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर भी तंज कसते हुए डॉ. गिरीश ने कहा, “जिस कानून व्यवस्था की बदहाली के नाम पर पिछली सरकार को मतदाताओं ने ‘गुड बाय’ कह दिया था, योगी सरकार उससे भी बुरी साबित हो रही है। योगी सरकार अपने राजनैतिक उद्देश्यों के लिए सांप्रदायिक तत्वों और दबंगों को खुली छूट दिए हुए है। अपनी इन बदनीयत कारगुजारियों से ध्यान हटाने को भाजपा, आरएसएस और स्वयं योगी आदित्यनाथ सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडे को हवा दे रहे हैं।”

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