वाह! दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली पूनम के गांव में नहीं है बिजली

Jul 27, 2017
वाह! दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली पूनम के गांव में नहीं है बिजली

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य पूनम यादव जो अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन कर रही हैं, लेकिन उनका गांव ही बिजली की रोशनी से महरूम है।

 

बता दें कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य पूनम यादव का जन्म 24 अगस्त 1991 को आगरा में हुआ। उन्होंने 2013 से अपने क्रकेट के सफर का आगाज़ किया। जहाँ इस साल महिला टीम ने अपने शानदार खेल से फाइनल में पुहंची, मगर फाइनल में जाकर इंग्लैंड के हाथों उसको हार का सामना करना पड़ा। लेकिन, इस हार के बावजूद इन की हर ओर खूब तारीफ हुई। लेकिन आपको ये जान कर बड़ी होगी कि पूनम यादव के गांव में आज भी बिजली नहीं है। देश को आज़ाद हए 70 साल हो गए हैं। लेकिन आज भी खिलाड़ी के गांव महुआहार में बिजली नहीं है।

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पूनम का गांव मैनपुरी के घिरौर कस्बा से दस किलोमीटर दूर है। रविवार को वर्ल्ड कप फाइनल हुआ जिस को पूनम के गांव वाले उनका खेल देखने के लिए घिरौर कस्बा आए। लेकिन इस इलाके में अपराध होने के चलते रात होते ही गांव लौटना पड़ा, जिसके बाद हर तरफ यही चर्चा थी की पूनम का मैच कैसे देखा जाए। लेकिन रात में उन लोगों ने ट्रैक्टर की बैट्री से टीवी चलाया और मैच को देखा।

इस गांव के बेटे-बेटियां तो पढ़ाई लालटेन की रोशनी में ही करते हैं। पूनम यादव के चचेरे भाई हरेंद्र यादव के मुताबिक “गांव के काफी लोगों ने घिरौर गांव में एक चायवाले की दुकान पर बैठकर मैच देखा। सबसे ज्यादा उत्साह युवाओं में था। इस में खास बात यह थी। कि कई बुजुर्ग भी ट्रै्क्टर से घिरोर पहुंचे थे। उन्हें क्रिकेट के बारे में कुछ खास जानकारी भी नहीं है लेकिन कह रहे थे, बिटिया खेल रही है, टीवी पर आ रही है, यह हमारे लिए गर्व की बात है, जरूर देखेंगे।”

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इस बारे में पूनम के पिता आरबी सिंह यादव का कहना है। कि पूनम के साथ पूरा परिवार तीन साल पहले गांव गया था। उस समय पूनम बांग्लादेश के खिलाफ टूर्नामेंट खेलकर भारत लौटी थीं। तो पूनम ने गांव जाने की ख्वाहिश रखी थी। भीषण गर्मी का समय था तो पूनम एक घंटे ही गांव में रुक पाई थी, और परिवार के लोगों से मिलकर वापस आगरा आ गई।

पूनम के इस गांव में 100 के लगभग घर हैं, और 500 से अधिक आबादी है। गांव के लोगों ने इस बारे में बताया कि ये बड़ा दुर्भाग्य है कि हमारी बेटी देश का नाम रोशन कर रही है, लेकिन हमारा गांव खुद ही रोशनी के लिए भटक रहा है।

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