विश्व आदिवासी दिवस: देश डिजिटल लेकिन समाज की मुख्यधारा से बाहर

Aug 09, 2016

नई दिल्ली। देश और दुनियाभर के कई देशों में आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष 23वां विश्व आदिवासी दिवस पूरे विश्वभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्रसंघ ने दुनियाभर के आदिवासी समाज के मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए प्रस्ताव पारित किया था। जिसके बाद से यह दिवस दुनियाभर में यह दिवस मनाया जाता है।

विश्व आदिवासी दिवस पर यूनाइटेड ओबीसी फोरम ने भी बधाई देते हुए कहा कि जब तक इस में आदिवासी समुदाय को मुख्यधारा में नहीं लाया जाता तब तक इस देश के विकास का कोई मायने नहीं। हमे 10% का विकास नहीं हमे पूरे देश की जनता का विकास चाहिए जो बिना आदिवासी समुदाय के विकास के बिना नहीं हो सकता।

उल्लेखनीय है कि विश्वभर के आदिवासियों के मानवाधिकारों को लागू करने और उनके संरक्षण के लिए 1982 मेँ संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक कार्यदल (UNWGEP) के उप आयोग का गठन हुआ जिसकी पहली बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई थी। आदिवासी समाज की समस्याओ के निराकरण हेतु विश्व के देशों का ध्यानाकर्षण के लिए सबसे पहले यूएनओ ने विश्व पृथ्वी दिवस 3 जून 1992 में होने वाले सम्मेलन के 300 पन्ने के एजेण्डे में 40 विषय जो चार भागों में बाटे गये तीसरे भाग मे रिओ-डी- जनेरो (ब्राजील) सम्मेलन मेँ विश्व के आदिवासियों की स्थिति की समीक्षा और चर्चा कर प्रस्ताव पारित किया था गया ऐसा विश्व मेँ पहली बार हुआ।

यूएनओ ने अपने गठन के पचास साल बाद महसूस किया कि 21 वीँ सदी में भी विश्व के विभिन्न देशों में निवासरत आदिवासी समाज अपनी उपेक्षा,गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा का अभाव,बेरोजगारी एवं बन्धुआ व बाल मजदूरी जैसी समस्याओ से ग्रसित है। अतः 1993 मेँ यूएनडब्लूजीईपी कार्यदल के 11 वेँ अधिवेशन मेँ आदिवासी अधिकार घोषणा प्रारुप को मान्यता मिलने पर 1993 को आदिवासी वर्ष व 9 अगस्त को आदिवासी दिवस घोषित किया गया।

अतः आदिवासियों को अधिकार दिलाने और उनकी समस्याओ का निराकरण, भाषा संस्कृति, इतिहास के संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा 9 अगस्त 1994 में जेनेवा शहर में विश्व के आदिवासी प्रतिनिधियों का विशाल एवं विश्व का प्रथम अन्तर्राष्ट्रीय आदिवासी दिवस सम्मेलन आयोजित किया। आदिवासियो की संस्कृति,भाषा, आदिवासियों के मूलभूत हक का सभी ने एक मत से स्वीकार किया और आदिवासियों के सभी हक बरकरार है इस बात की पुष्ठी कर दी गई और विश्व राष्ट्र समूह ने ” हम आपके साथ है ” यह वचन आदिवासियोँ को दिया। संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में व्यापक चर्चा के बाद से दुनियाभर के दोशों को आदिवासी दिवस मनाने का निर्देश दिया गया था।

लेकिन सवाल यह है कि यूएन के निर्देश के बावजूद भारत समेत दुनियाभर के देशों में आदिवासियों की हालत दोयम दर्जे की क्यों है? आदिवासी समाज देश की मुख्यधारा से बाहर क्यों है।

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