मुगल बादशाह के लफ्ज, बेटों के सिर कटने पर हिन्दुस्तानी बेटे अपने बाप के पास इसी अंदाज में आया करते हैं

Sep 07, 2016
मुगल बादशाह के लफ्ज, बेटों के सिर कटने पर हिन्दुस्तानी बेटे अपने बाप के पास इसी अंदाज में आया करते हैं

आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के बेटों के सिर जब मक्कार अंग्रेजों ने बादशाह के सामने पेश किये तो इस पर भारत के इस आखिरी मुगल बादशाह ने अंग्रेजों को जवाब दिया कि देश के लिए सिर कुरबान कर हिन्दुस्तानी बेटे अपने बाप के पास इसी अंदाज में आया करते हैं। 1857 की क्रांति को पूरी तरह दबा देने के मकसद से अंग्रेजों ने बादशाह बहादुर शाह जफर को निर्वासित कर रंगून भेज दिया।
बर्मा की राजधानी रंगून (वर्तमान में म्यांमार और यांगून) में जब वह अपने जीवन के आखिरी दौर में थे, तब वतन की याद में तड़पते हुए उनके लफ्जों से निकल पड़ा−
कितना है बदनसीब जफर दफन के लिए

दो गज जमीन भी न मिली कूए यार में।
इन पंक्तियों में उनकी देशभक्ति ही नहीं बल्कि अपनी माटी के लिए उनके दिल में भरी मुहब्बत भी झलकती है।

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