पवन पुत्र माँ अंजनी पुत्र का नाम हनुमान कैसे पड़ा

Feb 16, 2017
पवन पुत्र माँ अंजनी पुत्र का नाम हनुमान कैसे पड़ा

कलयुग में हिंदू धर्म में भगवान हनुमान का विशेष महत्व है पूरे भारतवर्ष में ही नहीं अपितु अन्य देशों में भी इनकी पूजा अर्चना की जाती है हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त के रूप में विख्यात है इनकी पूजा से शक्ति व बल बुद्धि एवं शांति के लिए किया जाता है. मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष दिन है वैसे तो शनि देवता को शांत करने के लिए शनिवार को भी पूजा अर्चना की जाती है

हनुमान जी पूरे जीवन में ब्रह्मचार्य का पालन किया हनुमान जी को बल बुद्धी ताकत है बल ब्रह्मचर्य का देवता माना जाता है हनुमान जी की मूर्ति ज्यादातर आप खड़ी मुद्रा में गदा धारण किए हुए दिखाई देगी लेकिन राम दरबार में हनुमान जी की तस्वीर में नीचे प्रणाम करने की मुद्रा में दिखाई देते हैं पूरे रामायण में हनुमान जी की अहम भूमिका है उनके साहस पराक्रम को पूरे रामायण में वर्णित किया गया है साथ ही साथ महाभारत के समय भी इनका उल्लेख किया गया है.

राजा केसरी तथा माता अंजना के पुत्र रूप में जन्म लिया ऐसा कहा जाता है कि माता अंजना एक अप्सरा थी और श्राप के कारण वानर जाति में आना पड़ा दंत कथाओं के अनुसार एक बार दुरबासा रिषि स्वर्ग लोक में इंद्र के पास गए वहां पर माता अंजना राजसभा में बार बार इधर उधर आ जा रही थी इसी बात पर रिसीव क्रोध में आकर बानर होने का श्राप दिया था माता अंजना शिव की परमभक्त थी इसलिए भगवान शिव ने उनको पुत्र रुप में प्राप्त हुए थे.

हनुमान जी के खाने पीने का माता अंजना बहुत ध्यान रखती थी हनुमान जी को भूख लगती माता कुछ न कुछ खाने को देती थी एक दिन माता अंजना किसी कार्य में व्यस्त थी हनुमान जी के ना मानने पर उन्होंने बगीचे से फल तोड़ कर खाने के लिए कह दिया हनुमानजी बगीचे में कोई भी फल अच्छा नहीं लगा उन्होंने ऊपर देखा तो सूर्य भगवान की लालीमा दिखाई थी हनुमान जी उड़कर सूर्य भगवान को ही अपने मुख में रख लिया इसलिए उनका नाम अंजनी पुत्र से हनुमान पड़ गया.

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