जब भी कुछ बड़ी चीज होती है तो बाधाएं आती ही हैं : आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री

Mar 11, 2016

हरित नियमों के उल्लंघन को लेकर अपने विशाल सांस्कृतिक आयोजन के विवादों में आने के बाद आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा कि जब भी कुछ बड़ी चीज होती है तो बाधाएं आती ही हैं.

श्री श्री ने इस ‘विश्व सांस्कृतिक महोत्सव’ को उनकी ‘निजी पार्टी’ करार देकर उनकी आलोचना करने वालों पर यह कहते हुए पलटवार किया कि जब भी कुछ बड़ी चीज होती है तो बाधाएं आती ही हैं.

इस तीन दिवसीय आयोजन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री श्री ने यह कहते हुए पर्यावरण की रक्षा करने की जोरदार वकालत की कि प्रकृति की देखभाल करना और उससे प्रेम करना तो हमारे डीएनए में है. इस उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे.

श्री श्री ने कहा, ‘‘किसी ने कहा कि यह गुरूजी की निजी पार्टी है. मैंने कहा, ‘हां’ (है). यह सच है क्योंकि पूरा विश्व ही मेरा परिवार है. जब किसी व्यक्ति को अपने लिए कोई जरूरत नहीं होती तब उसका संबंध पूरे समाज से होता है.’’

इसे अपनी तरह के पहले आयोजनों में एक के रूप में देखा जा रहा है जो वैश्विक शांति एवं विविधता में एकता के संदेश के प्रचार प्रसार के लिए आधात्मिक और धार्मिक नेताओं, राजनेताओं, उद्योगपतियों, शांतिदूतों, कलाकारों को मंच उपलब्ध कर रहा है.

आयोजकों ने बताया कि आर्ट ऑफ लिविंग ने अपनी 30 वीं वषर्गांठ मनाने के लिए 2011 में बर्लिन के ऐतिहासिक ओलंपिक स्टेडिम में ऐसे ही शांति समारोह का आयोजन किया था.

यहां आयोजन तब विवादों में आ गया जब पर्यावरणविदों ने आरोप लगाया कि उसकी तैयारी से यमुना के बाढ़ के डूब वाले इलाके की पारिस्थितिकी का नुकसान हुआ है और उन्होंने उसे रोकने की मांग की.

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आर्ट ऑफ लिविंग को यह समारोह करने तो दिया लेकिन उस पर पांच करोड़ रूपए का जुर्माना भी लगाया.

एनजीटी में चल रही कानूनी लड़ाई की ओर परोक्ष संकेत करते हुए श्री श्री ने कहा, ‘‘जब हम कुछ बड़ी चीज करना चाहते हैं तो कई बाधाएं आती हैं. लेकिन यह इस बात का इशारा करती है कि हमने कोई बड़े महत्वपूर्ण काम को हाथ में लिया है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘जब कुछ गलत किया जाता है तो बाधाएं नहीं आती हैं. लेकिन जब कोई बड़ी चीज की जाती है तो बाधाएं आती ही हैं. लेकिन सारी बाधाएं दूर कर ली जाती है और अंतिम परिणाम मधुर होता है.’’

आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक ने अपने अनुयायियों से कहा कि जब भी उनके सामने मुश्किलें आएं तो वे पूरे साहस से उनका मुकाबला करें.  उन्होंने कहा, ‘‘हम पर्यावरण की देखभाल करें. हम प्रकृति से स्नेह करते हैं. यह हमारे डीएनए में है.’’

उन्होंने अपने काम से देश की सेवा करने के लिए किसानों की सराहना की. उन्होंने जैविक खेती के फायदों का संक्षेप उल्लेख किया और एक उदाहरण दिया कि पारंपरिक खेती से जैविक खेती की ओर बढने पर कैसे कैसे एक किसान की कमाई 40 हजार रूपए से बढ़कर 4 लाख रूपए हो गयी.

इस मौके पर कई किसानों को मोदी ने पुरस्कृत किया. श्री श्री ने मोदी को ‘अतिप्रिय प्रधानमंत्री’ कहकर उनका स्वागत किया.

श्री श्री ने सह-अस्तित्व और विविधता के विचारों को भी स्पर्श किया. उन्होंने कला, खेलकूद और बौद्धिक विमर्श समेत पांच चीजों के बीच आध्यात्मिकता का हवाला दिया जो दुनियाभर में लोगों को जोड़कर रखती है.

इस आयोजन में विभिनन देशों के लोग पहुंचे थे. इस पर श्री श्री ने कहा कि विभिन्न देशों के लोग ‘हम एक हैं’ का संदेश देने के लिए एकत्र हुए हैं. उन्होंने कहा, ‘‘आर्ट ऑफ लिविंग जीवन को उसकी पूर्ण क्षमता के साथ जीने का दर्शन है.’’

 

 

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