जब होता है मां बनने का पहली बार अहसास

Jan 31, 2017
जब होता है मां बनने का पहली बार अहसास

अपने बच्चे को गोद में लेने का वह एहसास को जिंदगी भर बाँध कर रखता है । वही पैदा हुआ बच्चा भी अपनी मां के टच को पहचान के खुद को सुरक्षित महसूस करता है । माना के अब बच्चे को पैदा होते ही तुरंत जांच और साफ सफाई के लिए भेज दिया जाता है।

इस प्रक्रिया के बाद ही उसको मां के पास सौंपा आ जाता है  जबकि बच्चे को तुरंत बाद इनक्यूबेटर पर लेटा दिया जाता है। जबकि उसे एक एहसास की जरूरत होती है दरअसल 9 महीने मां की कोख में रहने के बाद वह उसके सुरक्षित घेरे में से बाहर निकल के काफी घबराहट महसूस करता है ।

गोद में ही नव जमा पैदा हुआ बच्चा अपनी मां की आवाज को पहचानता है। छूने के एहसास को पहचान रखता है और मां के सास और दिल की धड़कन को अच्छी तरह पहचानता है।

चमड़ी के साथ चमड़ी का संपर्क नये पैदा हुए बच्चे की शारीरिक तापमान दिल की धड़कन और ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखने में मदद करता है । इसके साथ मां और बच्चे दोनों ही सुरक्षित और शांत महसूस करते हैं ।

जरूरी है 48 घंटे में दूध पिलाना
डॉक्टर और विजय कृष्णा मुताबिक पैदा हुए बच्चे को जन्म से पहले जन्म के पहले 48 घंटे में दूध पिलाने की बहुत जरूरत है ।पर आजकल इंफेक्शन के डर के कारण सब नर्स छाती को दवाई भरपूर रुई के साथ साफ कर देते हैं । जिसके साथ में महक खत्म हो जाती है।

जिसके साथ में पैदा हुआ बच्चा अपनी मां के छूने को पहचान नहीं पाता है । हालांकि वह मां की छाती को साफ करने से लेकर बच्चे की सफाई तक वह सब चीजों को हर चीज़ हटा दी देता है ।

जो नए पैदा हुए बच्चे के लिए बहुत जरुरी होता है पर मां की यह बैक्टीरिया बच्ची के लिए असल में बहुत जरुरी होते हैं ।जिसको माइक्रो थाइसे कहते हैं । इसलिए हमें यह बात तो नहीं भूलनी चाहिए कि पैदा वह बच्चा का पहला अवतार उसकी मां पर निर्भर होता है और पैदा होने के तुरंत बाद भी ही मां से उसको अलग कर देना पूरी तरह गलत है ।
चाहे वह सिर्फ सिजेरियन डिलीवरी हो चाहे वह नॉर्मल डिलीवरी होगी । सिजियेरिण डिलीवरी में बच्चा अपनी मां के छूने का एहसास को पहचान ही लेता है।

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