कैसे बनता है सोना, जानिए ये बातें

Feb 03, 2017
कैसे बनता है सोना, जानिए ये बातें

सोना बहुत ही चमकदार और यह एक मूल्यवान धातु हैं. यह जो सोना होता हैं प्राय अवस्था में पाया जाता हैं. यह एक उत्तम गुड़ का तत्व माना जाता हैं जिसके कारण से उसके यौगिक प्राय अस्थाई ही होते हैं. सोना अग्नये चट्टानों में बहुत छोटी छोटी मात्रा में वितरित रहता हैं. और इसका समय के साथ क्वार्टज़ नलिकाओं में इसकी मात्रा में वृद्धि हो गई हैं.यह प्राकृतिक क्रियाओं के फलस्वरूप कुछ खनिज पदार्थ में जैसे की लोहा, पाइराइट, सीस ,सल्फाइड, चेलकोलाइट आदि अयस्को के साथ स्वर्ण भी कुछ मात्रा में जमा हो जाता हैं.

यद्यपि इसकी मात्रा न्यून ही रहती हैं. परंतु इन धातुओं का शोधन करते समय जो स्वर्ण होता है. उसकी समुचित मात्रा मिल जाती हैं चट्टानों पर जल के प्रभाव के द्वारा सोना छोटी मात्रा में पथरीले तथा रेतीले स्थानों में जमा होने के कारण पहाड़ी जल स्त्रोतों में कभी-कभी इसके छोटे-छोटे कण मिल जाते हैं.

हमारे भारत में लगभग विश्व का 2 प्रतिशत सोना प्राप्त होता हैं. यह सोना मैसूर के कोलार के खानों से निकलता हैं. कोलार में सोने की 5 खाने हैं. खानों में सोना पारद के साथ पार्देन तथा सायनाइड विधि द्वारा निकाला जाता हैं उत्तर मे सिक्किम प्रदेश में भी स्वर्ण अन्य अयस्कों के साथ मिश्रित अवस्था में मिला करता हैं

बिहार के मानसून सिंघ्भुम जिले में स्वर्णरेखा नदी के अन्दर भी सोने के छोटे-छोटे कण प्राप्त होते हैं. दक्षिण अमेरिका कोलंबिया में मैक्सिको , संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के कैलिफोर्निया तथा अलास्का प्रदेश ऑस्ट्रेलिया तथा दक्षिण अफ्रीका में सोना की पैदावार का यह मुख्य केंद्र माना जाता हैं ऐसा मानना हैं की, 15 वी शताब्दी के अंत में आज तक उत्पादित स्वर्ण को सजा कर रखा जाए तो लगभग 20 मीटर तो लंबा चौड़ा तथा ऊंचा घन बनेगा. हैरानी तो ये है की इतनी छोटी मात्रा के पदार्थों द्वारा मनुष्य के भाग्य का नियंत्रण होता रहा हैं.सोना निकालने की पुरानी विधि पहले लोग चट्टानें की रेतली भूमि को छेद वाले तावो में धोया करते थे. सोना भारी होता हैं,जिसे नीचे बैठ जाता है .

उसके बाद सोना का चूर्ण कर पारद की परतदार ताम्बे की थालियों में धोते थे. जिससे ज्यादा से ज्यादा सोना थाली में जमा रहता है . ये सोना साइनाइड विधि द्वारा ऐसे-ऐसे अयस्को से सोना निकला जा सकता था सोना निकालने की और भी विधिया हैं . आपको पता हैं, सोना एक पीले रंग का धातु हैं जब सोने में भी धातु मिलाई जाती हैं तब सोने का रंग बदल जाता हैं, इसमें जब रजत धातु मिलाते हैं तो इसका रंग हल्का पड़ जाता हैं जब तांबा मिलाते हैं तो सोने का रंग गहरा हो जाता हैं सोना बहुत ही कोमल धातु हैं, यह सोना थालियों में जम जाता हैं उसके बाद इसको थाली से खुरच के निकला जाता हैं.

इसके इलावा सायनाइड विधि द्वारा सोना निकाला जा सकता हैं क्योंकि इनमे सोना की मात्रा न्यूनतम रहती हैं. सोना जो हैं भारी वजन वाला होता हैं. और रेतीली मिटटी बह जाती हैं सोना नीचे जम जाता हैं फिर उसे खुरच कर निकाल लिया जाता हैं

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