क्या यह नही दिखता,13 करोड़ भारतीय दूषित पानी पीने को मजबूर

Jun 29, 2016

नई दिल्ली: भारत के लगभग 130 मिलियन लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां भूमिगत जल की आपूर्ति में आरसीनक या नाइट्रेट जैसे खतरनाक सामग्री रहे हैं।

समाचार एजेंसी एएफपी की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत ‘गंग नाउली’ गांव में लोगों को आशंका है कि उनके क्षेत्र में भूमिगत पानी स्थानीय इडस्ट्रीज से उत्सर्जित सामग्री ने दूषित कर दिया है। इस गांव के निवासी देवी राथी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, ” सरकार को कुछ करना चाहिए, मेरे बच्चे अक्सर पेट में दर्द और त्वचा पर चकत्ते की शिकायत करते हैं। में उनके स्वास्थ्य के लिए चिंतित हूँ। ” देवी कहती है कि गरीबी के कारण वे अमीर घरानों की तरह वाटर फिल्टर नहीं खरीद सकती।

गंग नाउली में दूषित पानी का उपयोग रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने हैण्ड पंपों पर लाल रंग से चिह्नित कर दिए हैं। हालांकि कई लोग घरों में बोरिंग के माध्यम से भूमिगत पानी का उपयोग कर रहे हैं और आशंका है कि यह पानी भी प्रदूषित नदियों की वजह से मानव उपभोग के लायक नहीं रहा। गांव के मुखिया धर्मेन्द्र राथी का कहना है कि इस गांव के लगभग पांच हजार निवासियों को अब पाइप के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है जिससे हालात पहले से बेहतर हैं लेकिन इस क्षेत्र के लिए जल प्रदूषण अभी भी एक बड़ी समस्या है क्योंकि आसपास के क्षेत्रों में स्थापित कारखानों से विषाक्त सामग्री अभी भी नदियों में नष्ट किया जा रहा है।

‘विश्व संसाधन संस्थान’ के एक अध्ययन के अनुसार भारत में 20 लाख लोग ऐसे क्षेत्रों में रह रहे हैं जहां न्यूनतम ऐसी तीन जहरीली धातु या सामग्री स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित मात्रा से अधिक दर में पाए जाते हैं और भारत के लगभग 130 मिलियन लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां भूमिगत जल की आपूर्ति में आरसीनक या नाइट्रेट जैसे खतरनाक सामग्री रहे हैं।

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>