युद्ध कोई विकल्प नहीं है भारत-पाकिस्तान के लिए: बासित

May 31, 2016

भारत में पाक के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने पठानकोट आतंकवादी हमले को द्विपक्षीय शांति वार्ता के बीच रुकावट नहीं बनने देने की अपील करते हुये कहा कि युद्ध दोनों देशों के लिये कोई विकल्प नहीं है.

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने पठानकोट आतंकवादी हमले को द्विपक्षीय शांति वार्ता के बीच रुकावट नहीं बनने देने की अपील करते हुये कहा कि युद्ध दोनों देशों के लिये कोई विकल्प नहीं है.

हालांकि श्री बासित ने गत दो जनवरी को पठानकोट वायुसैनिक अड्डे पर हुये आतंकवादी हमले की जांच के सिलसिले में भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी के प्रस्तावित पाकिस्तान दौरे को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई. गौरतलब है कि पठानकोट हमले की जांच के लिए पाकिस्तान का संयुक्त जांच दल भारत आया था.

दिल्ली स्टडी ग्रुप द्वारा आयोजित एक कार्यक्रत से इतर श्री बासित ने एक सवाल के जवाब में कहा, हम पठानकोट मामले पर सहयोग कर रहे है और जल्द ही इसकी तह तक पहुंच जाएंगे. इससे पहले कार्यक्रम में अपने संबोधन में श्री बासित ने कहा कि दोनों देशों के लिए युद्ध कोई विकल्प नहीं है और सबसे पहले उन्हें अपने बीच की समस्याओं को पहचानना चाहिये.
श्री बासित की यह टिप्पणी पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक माने जाने वाले अब्दुल कादिर के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के पास नयी दिल्ली को पांच मिनट के अंदर निशाना बनाने की क्षमता है.

श्री बासित ने कहा, भारत के साथ हमारे कुछ जरुरी मुद्दे है. हम सभी शांतिपूर्ण संबंध चाहते हैं लेकिन सिर्फ बातचीत से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा. हमें वास्तविकता देखनी होगी और विवादों को सुलझाना होगा चाहे वह कश्मीर हो, सर क्रीक, पानी का मुद्दा या आतंकवाद का मसला हो.

 

पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने कहा कि उनका देश सभी पड़ोसी देशों के साथ शांति और स्थिरता चाहता है. साथ ही उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में कोई बाहरी दखल नहीं होना चाहिये. उन्होंने कहा, अफगानिस्तान बहुत गंभीर मसला है. हम शांति चाहते है और चाहते हैं कि शरणार्थी अपने-अपने देशों में लौट जाए लेकिन अफगानिस्तान के सभी पड़ोसियों को यह सुनिश्चित करना चाहिये की वहां पर विदेशी हस्तक्षेप न हो. इसी तरह भारत के साथ हमारे संबंध बहुत महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया से केवल पांच प्रतिशत उद्योग हो रहा है जबकि यूरोपीय संघ जैसे क्षेत्रों में 35 प्रतिशत उद्योग की क्षमता है. अब इस ओर ध्यान केन्द्रित करने का समय आ गया है.

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