उत्तर प्रदेश: दरोगाजी ने नाम पूछा, फिर बोले साले मुसलमान हैं, फिर पिटाई शुरू कर दी

Apr 13, 2017
उत्तर प्रदेश: दरोगाजी ने नाम पूछा, फिर बोले साले मुसलमान हैं, फिर पिटाई शुरू कर दी

रिहाई मंच ने यूपी की बलिया पुलिस पर आरोप लगाया है कि उसने मुसलमानों को धार्मिक द्वेष की वजह से पीटा है। रिहाई मंच ने कहा है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही प्रदेश की पुलिस बजरंगदल-हिंदू युवा वाहिनी की तरह रवैया अपनाने लगी है, जिससे पुलिस की अपनी विश्वसनियता ही खतरे में पड़ गई है। मंच ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।

रिहाई मंच ने पहलु खान की निर्मम हत्या की याद दिलाते हुए कहा कि वहां तो अपराधियों ने मुसलमान को उसके धार्मिक पहचान के आधार पर मारा। लेकिन यहां तो यूपी पुलिस ने यह काम खुद कर रही है।

रिहाई मंच के बलिया जिले के महासचिव बलवंत यादव ने प्रेस कॉपी जारी कर पूरे मामले की जानकारी दी है। 6-7 अप्रैल की रात को ग्राम बहेरी निवासी मुश्ताक उर्फ दौलत (25) साल पुत्र मुल्तान, इसरार खान (48) साल पुत्र मंगरू खान, और सुभाश बिंद (25) साल पुत्र सुरेश बिंद मछली मारने के लिए लालगंज धाना क्षेत्र स्थित गंगा घाट गए थे। जहाँ करीब रात साढ़े 12 बजे के करीब चार पुलिसकर्मी आये। जिनमें से एक सादी वर्दी में सायद दारोगा भी थे, आकर उनसे पूछताछ करने लगे। जब उन्हें पता चला की उनका नाम इसरार, मुश्ताक और सुभाष बताया तो पुलिस वालों ने सुभाष को दो-तीन थप्पड़ मार कर वहां से भगा दिया और बाकी दो को मां-बहन की गालियां बकते हुए पीटने को कहा।
जिसके बाद सभी पुलिस वालों ने मिलकर उन दोनों की बुरी तरह पिटाई की। फिर वे उन्हें चैकी ले गए जहां फिर से उन्हें गालियां देते हुए डंडों से पीटा। इसके बाद पुलिस वालों ने बाद में उन्हें यह कहते हुए वहां से भगा दिया गया। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने मुश्ताक उर्फ दौलत का मोबाइल भी छीन लिया।

रिहाई मंच के बलिया जिले के महासचिव बलवंत यादव ने बताया है कि मामले की सूचना मिलने पर 10 अप्रैल को उन्होंने, इंडियन पीपुल्स सर्विसेज (आईपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद गोंडवाना, रिहाई मंच के जिला अध्यक्ष डॉ. अहमद कमाल, सचिव मंजूर आलम, रोशन अली के साथ जाकर पीड़ितों से मिले। उन्होंने दोनों पीड़ितों का इलाज जिला अस्पताल में करवाया। आईपीएस नेता अरविंद गोंडवाना ने बताया कि पीड़ित योगी सरकार में पुलिस के खिलाफ शिकायत करने से डर रहे हैं। उन्हें इस बात का डर है कि पुलिस उन्हें आगे चलकर फिर किसी मामले में न फंसा दे। वही गोंडवाना पुलिस की विश्वसनियता पर सवाल उठाते हुये कहा कि जब पुलिस ही जनता को धर्म और जाति पूछकर मारेगी तो पुलिस और साम्प्रदायिक तत्वों में क्या फर्क रह जाएगा।

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