साढ़े चार CM चला रहे हैं उत्तर प्रदेश

Aug 18, 2016

उत्तर प्रदेश में इस वक्त एक नहीं बल्कि साढ़े चार मुख्यमंत्री मिलकर चला रहे हैं बसपा सरकार में ताकतवर मंत्री रहे नसीमुद्दीन ने कुछ दिनों पहले जब उत्तर प्रदेश सरकार के बारे में यह टिप्पणी की थी तो इसके जवाब में शिवपाल ने नसीमुद्दीन को चुप रहने की नसीहत दे डाली थी लेकिन अब यही बात जनता कह रही है। नसीमुद्दीन ने कहा थी कि इन सबके बीच अखिलेश की स्थिति आधे मुख्यमंत्री की है। शिवपाल के इस्तीफे की धमकी और उसके बाद मुलायम द्वारा अखिलेश को डी गई कड़ी नसीहत के बाद कहीं न कहीं जनता के बीच इस बात का सन्देश पंहुचा है कि उत्तर प्रदेश में केवल अखिलेश का राज नहीं है.

इस प्रदेश को आज भी मुलायम के भाइयों शिवपाल और रामगोपाल के अलावा आजम खान भी चला रहे हैं ,निस्संदेह कभी सीएम अखिलेश भारी पड़ते हैं कभी शिवपाल ,कभी आजम तो कभी सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव। शिवपाल और मुलायम ने सार्वजनिक तौर पर पिछले एक सप्ताह के दौरान जो बातें कहीं उनसे यह साफ़ पता चलता है कि रिश्तों की तल्खी सिर्फ शिवपाल और अखिलेश के बीच ही नहीं पैदा हुई है बल्कि यह तल्खी रामगोपाल और शिवपाल के बीच भी है। निस्संदेह इस तल्खी के पीछे कहीं न कही मुलायम सिंह यादव के परिवार मे भाइयों के बीच छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई भी है।

मुलायम सिंह के परिवार में छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई का यह खेल दरअसल उस वक्त शुरू हुआ था जब अखिलेश के करीब माने जाने वाले रामगोपाल ने अमर सिंह की पार्टी से राज्यसभा के लिए उम्मीदवारी रोकने की कोशिश शुरू की थी ,उस वक्त रामगोपाल यादव की नहीं चली और उस वक्त अपने प्रिय अमर सिंह को शिवपाल राज्यसभा में भेजने में सफल रहे। रामगोपाल को दूसरी शिकस्त तब मिली जब प्रदेश चुनाव के प्रभारी बनने के बाद शिवपाल ने रामगोपाल को बिना विश्वास में लिए उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी । इस वर्ष जब मथुरा कांड में शिवपाल सिंह का नाम उछला तो भी न मुख्यमंत्री अखिलेश यादव न ही सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के रुख में शिवपाल को लेकर कोई नाराजगी नजर आई । लेकिन जब शिवपाल ने मुख्तार की पार्टी को सपा में विलय की घोषणा करी रामगोपाल को तुरुप का पत्ता मिल गया उन्होंने मुख्तार की पार्टी के विलय को भंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और इसमें सफल भी रहे।


रामगोपाल यादव और आजम खान की नजर अब शिवपाल द्वारा तय किये गये विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों पर है। रामगोपाल ने अखिलेश को विश्वास में लेते हुए प्रदेश भर मंडलवार पर्यवेक्षक नियुक्त करा दिये हैं जो कि घोषित उम्मीदवारों के जमीनी पकड़ पर रिपोर्ट बनाकर शीर्ष नेतृत्व को देंगे। रामगोपाल ने यह बात सार्वजनिक तौर कही भी है कि घोषित उम्मीदवारों में बदलाव भी किया जा सकता है। समाजवादी सूत्रों कि माने तो आजम खान और रामगोपाल मिलकर महत्वपूर्ण सीटों पर ऐसे उम्मीदवारों की फेहरिस्त तैयार कर रहे हैं जो सीधे तौर पर अखिलेश या फिर उनके संपर्क में होंगे। इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि राज्य की राजनीति में रामगोपाल का चेहरा शिवपाल की तुलना में ज्यादा पाक साफ़ है,हांलाकि शिवपाल की पार्टी कैडरों के बीच पकड़ रामगोपाल से ज्यादा है। रामगोपाल मौके दर मौके अखिलेश के साथ खड़े रहते हैं जबकि शिवपाल ने अखिलेश की अवहेलना करके अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव से ही संपर्क रखा है,जो कि अखिलेश यादव को भी नागवार गुजरा है ।

कुनबे की इस लड़ाई में सबसे दिलचस्प कैरेक्टर आजम खान का है । |अमर सिंह के कट्टर विरोधी आजम खान इस पूरे मसले में अखिलेश और रामगोपाल के साथ तो खड़े हैं ,लेकिन किसी भी कीमत पर वह सपा सुरीमो मुलायम सिंह यादव को नाराज नहीं करना चाहते हैं| पार्टी सूत्रों का कहना है कि आजम खान इस्तीफे और मुख्तार से जुडी इस राजनीति में अमर सिंह की संलिप्तता की रिपोर्ट मुलायम सिंह को दी है ,लेकिन वो सार्वजनिक तौर पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं । आजम खान ने अखिलेश को भी चेताया है कि किसी भी कीमत पर कौमी एकता दल के विलय को सफल नहीं होने देना है माना जाता है कि अगर सपा में किसी भी किस्म की टूट फूट होती है तो आजम खान इसका ठीकरा भी अमर सिंह पर ही फोड़ेंगे.

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