दो साल के गुनाहों का कफ्फारा है यौमे जिलहिज्जा का रोज़ा

Aug 24, 2017
दो साल के गुनाहों का कफ्फारा है यौमे जिलहिज्जा का रोज़ा
जिलहिज्जा की दसवीं तारीख को ईद-उल-अजहा (बकरीद) मनायी जाती है। मस्जिद छीपियान के इमाम मौलाना अब्दुल खालिक ने ‘यूपीयूकेलाइव’ से विशेष बातचीत में इस माह के बारे में विस्तार से बताया।
तमाम दिनों रात अल्लाह तआला के बनाए हुए हैं, मगर अल्लाह ने बाज़ को बाज़ पर फजीलत बख्शी है। मसलन हफ्ते के सात दिनों में जुमा को बक़्या अय्याम पर फजीलत है। बारह महीनों में रमज़ान को दीगर महीनों पर फजीलत है। बिल्कुल इसी तरह माह जिलहिज्जा के अशरा-ए-अव्वज को फजीलत हासिल है। कुरआन करीम में अल्लाह ने कसम खाकर इरशाद फरमाया कसम है फजर की और दस रातों की। दस रातों से ज़िलहिज्जा की दस रातें मुराद हैं।
आप (स.अ.व.) ने इरशाद फरमाया कि कोई भी दिन ऐसा नहीं जिसमें अल्लाह तआला को नेक अमल उन दस अय्याम से ज्यादा पसंदीदा हो। इस अय्याम में एक दिन का रोज़ा एक साल के रोजे के बराबर होता है और इन दिनों की एक रात में इबादत करना शबे कद्र में इबादत करने के बा कद्र है।
 
इन अय्याम में आप (स.अ.व) का एहतमामे इबादत
हजरते हफ्सा (रजि.) फरमाती हैं कि आप (स.अ.व.) चार चीजों को कभी नहीं छोड़ते।
1- आशोरा के रोज़े
2- अशरा ए जिलहिज्जा के रोज़े (अशरा से मुराद नौ दिन हैं)
3- हर माह के तीन रोज़े
4- फजर से पहले की दो रकात ।
 
यौमे अरफा का रोज़ा
हुजूर (स.अ.व.) ने इरशाद फरमाया जिसने अरफा के दिन यौमे जिलहिज्जा का रोज़ा रखा। उसके दो साल के मुसलसल गुनाह माफ हो जाते हैं। दूसरी रिवायत में है- एक साल गुज़श्ता और एक साल आइंदा के गुनाहों का कफ्फारा है।
 
बाल और नाखून न कटवाना
एक रिवायत में है कि जो शख्स जिलहिज्जा का चांद देखे और कुर्बानी करने का इरादा रखता हो तो वो अपने बाल और नाखून न काटे।
(मुहम्मद फैज़ान, मुरादाबाद)
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