जहरीली हवा: दिल्ली-NCR में रहने वालों की उम्र 6 साल घटी..

Nov 10, 2017
जहरीली हवा: दिल्ली-NCR में रहने वालों की उम्र 6 साल घटी..

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में रहने वाले लोगों की जिंदगी खतरनाक वायु प्रदूषण की वजह से लगभग छह साल कम हो चुकी है। रिसर्च में खुलासा हुआ है कि बाकी शहरों की तुलना में दिल्ली में फैली हवा ने लोगों का जीना तो बेहाल कर ही रखा है, साथ ही Smog ने लोगों की जीवन के 6 साल भी कम कर दिए हैं। देशभर में लोग दिल्ली-NCr वालों की तुलना में 6 साल अधिक जिएंगे।

बता दें कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक, जहरीली वायु के संपर्क में आने पर फेफड़े, रक्त, संवहनी तंत्र, मस्तिष्क, हृदय और यहां तक कि प्रजनन प्रणाली भी प्रभावित हो रही है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। वहीं आईएमए के अध्यक्ष डॉक्टर केके अग्रवाल का कहना है कि “दिल्ली की आबोहवा पिछले कुछ दिनों में बेहद खराब हुई है। सुबह के वक्त हवा सबसे ज्यादा जहरीली हो जाती है। इसका सबसे बुरा असर बुजुर्ग और बच्चों पर पड़ रहा है।” डॉ अग्रवाल के मुताबिक अगर एनसीआर में WHO मानकों को सही तरह से लागू किया जाए तो लोग नौ साल अधिक जी सकेंगे।

उन्होंने बताया कि एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण पूरे देश में पांच लाख अकाल मौतें हो चुकी हैं। इसके अलावा जहरीली हवा की वजह से हर साल फेफड़े, रक्त, संवहनी तंत्र, मस्तिष्क, हृदय और और प्रजनन प्रणाली से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आईएमए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष को इस महीने प्रस्तावित अर्ध-मैराथन को तत्काल रद्द या स्थगित करने के लिए लिखने जा रहा है. यह ईवेंट तब तक नहीं होनी चाहिए, जब तक कि हवा की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार न हो जाए।

आईएमए अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एयूआई) पिछले कुछ दिनों में अत्यंत खराब से खतरनाक की श्रेणी में जा पहुंचा है। शहर के कई हिस्सों में, वायु प्रदूषण का स्तर 300 के खतरे के निशान को भी पार कर गया है। इससे गर्भ में पल रहे शिशु तक प्रभावित हो सकते हैं। वहीं क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसऑर्डर जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं और फेफड़ों पर बेहद बुरा असर पड़ सकता है।

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