मुस्लिम लड़के को गोकशी का अपराध कबूल करवाने के लिए यूपी पुलिस बनी हैवान, प्लास से नोंचे नाखून अौर कान

Dec 18, 2017
मुस्लिम लड़के को गोकशी का अपराध कबूल करवाने के लिए यूपी पुलिस बनी हैवान, प्लास से नोंचे नाखून अौर कान

एक बार फिर से योगी सरकार की उत्तर प्रदेश पुलिस का खौफनाक चेहरा सामने आया है। जहाँ एक निर्दोष मुस्लिम युवक को पुलिस ने उसके गहरा से उठाकर लॉकप में बंद कर दिया। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि उसे गोकशी का अपराध कबूल करवाने के लिए उसकी खूब पीटाई की लेकिन, जब उसने ऐसा करने से मना कर दिया तो दरोगा ने दूसरे पुलिसवालों की मदद से उसके कान और नखूनों को प्लास से नोच कर लहूलुहान कर दिया।

बता दें कि मिली रिपोर्ट्स के अनुसार ये घटना उत्तर प्रदेश के कानपुर की है। ऐसा बताया जा रहा है कि सजेती थाना क्षेत्र के भाद्वारा गांव में रहने वाले जाकिर हुसैन मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करते है। उनके परिवार में उनकी पत्नी नजमा बड़ा बेटा शहंशाह ,जनाब ,अन्नू ,पत्तर, राजू के साथ रहते हैं। अपने पिता के काम में उनका बेटा शहंशाह भी हाथ बटाता है। उनके बेटे शहंशाह की शादी के करीब 4 साल पहले नगमा से हुई थी। जिसके फिलहाल दो बच्चे जानू (03), अलिया (02) है। इस घटना के बारे में शंहशाह ने बताया कि ‘मेरा किसी थाने व चौकी में कोई अपराधिक इतिहास नहीं है, लेकिन कुआखेड़ा के चौकी इंचार्ज बृजेश भार्गव ने मुझे विलन बना दिया और झूठा केस दर्ज कर जेल भेज दिया।’

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शंहशाह के वकील राज कुमार शर्मा के अनुसार ‘पुलिस ने शंहशाह को फर्जी तरीके से चाकू लगाकर जेल भेजा था। जबकि उसका कोई भी अपराधिक इतिहास नहीं है। लेकिन उसके बाद भी पुलिस शंहशाह की गिरफ्तारी 13 दिसंबर की रात 10 बजे दिखाया है। जिसके अगले दिन ही शहंशाह को कोर्ट में पेश किया गया। जहाँ उसके मेडिकल में 6 चोटों के निशान थे जो बेहद गंभीर थीं। हमने इसी आधार पर कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दिया था कि पुलिस ने शहंशाह को टार्चर और जबरन वो जुर्म कुबूल करवाने के लिए पीटा है। जिसकी वजह से उसके कान व नखून सहित अन्य चोटें आई हैं। कोर्ट ने हमारी तत्वों को गंभीरता पूर्वक लेते हुए दरोगा बृजेश भार्गव को पेश होने के तलब किया है। साथ ही पुलिस के अलाधिकारियों से पूरे प्रकरण की जांच करने को कहा है।’

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इस बारे में शहंशाह ने बात करते हुए बताया कि ’13 दिसंबर 2017 की शाम पिता जाकिर मुझे डांट रहे थे। इसी दौरान वहां से कुआखेडा चौकी इंचार्ज बृजेश भार्गव निकल रहे थे। थोड़ी ही देर में वो वहां आ धमके और मुझे मारते हुए चौकी की तरफ ले गए, जबकि मेरे पिता उनके हाथ पैर पकड़ कर ये कहा रहे थे कि मैं अपने बेटे को डांट रहा था इसमें चौकी ले जाने वाली कौन सी बात आ गई है।’ शंहशाह ने आगे बताया कि ‘दरोगा बृजेश भार्गव और अन्य सिपाहियों ने ठंडभरी रात में मेरे हाथ-पैर बांध दिए और मुझसे जबरदस्ती गोकशी करने की बात कबूल करने के लिए कहते रहे। लेकिन जब मैंने झूठा जुर्म कबूल करने से इंकार कर दिया तो उन्होंने मेरे कान और नखूनों को प्लास से नोच कर लहूलुहान कर दिया।

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इतना ही नहीं बल्कि इस दौरान उन्होंने मुझ से कहा कि ‘तुम 10 हजार की व्यवस्था करवाओ हम तुम्हें छोड़ देंगे। मेरे पिता ने कई लोगों से उधारी लेकर उन्हें 10 हजार रुपए दिए, लेकिन इसके बावजूद पुलिसवालों ने चाकू लगाकर मुझे जेल भेज दिया।’ जेल भेजने से पहले पुलिस ने मेरा मेडिकल भी कराया था ,लेकिन जब मैं सिविल जज जूनियर डिविजन घाटमपुर के समक्ष पेश हुआ और पूरी घटना की जानकारी जज को बताई तो उन्होंने 15 दिसंबर 2017 को मुझे जमानत दे दी। साथ ही दरोगा को कोर्ट में पेशी के आदेश दिए। इसी के बाद से दरोगा कुछ दबंगों को घर भेज कर मुझ पर समझौते का दबाव बना रहा है। इसकी शिकायत हमने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल में की है। जिसकी जांच की जा रही है।

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