पाकिस्तान को मदद करने के खिलाफ हैं अमेरिकी सीनेटर

Mar 12, 2016

अमेरिका के सीनेटरों ने करदाताओं के धन से पाकिस्तान को 70 करोड़ डॉलर के आठ एफ-16 लड़ाकू विमान खरीदने में सैन्य मदद देने का कड़ा विरोध जताते हुए आतंकी संगठनों के खिलाफ लड़ने की इस्लामाबाद की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया है.

हालांकि अपने राजनीतिक कारणों के चलते इन सीनेटरों ने पाकिस्तान को आठ एफ-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री न करने वाले प्रस्ताव को पटल पर रखने की मंजूरी नहीं दी.

हालांकि सीनेट की विदेश संबंधों की समिति की उपेक्षा करते हुए पाकिस्तान को एफ-16 विमानों की बिक्री के खिलाफ फैसला लेने के कदम को सीनेट ने 71-24 वोटों के अंतर से नामंजूर कर दिया. कांगेस के सूत्रों ने बताया कि लगभग दो दर्जन प्रभावशाली सीनेटर कांग्रेस में मौजूद पाकिस्तान-विरोधी भावनाओं को प्रतिबिंबित करते हैं.

सीनेटरों ने पाकिस्तान को एफ-16 की बिक्री न करने से जुड़े प्रस्ताव को पटल पर रखने से रोकने के पक्ष में मतदान किया लेकिन किसी भी सीनेटर ने इस्लामाबाद के समर्थन में बात नहीं कही.

वास्तव में, अपनी पार्टी लाइनों से ऊपर उठते हुए सीनेटरों ने पाकिस्तान के ‘दोहरे’ रवैये की ओर इशारा किया और एक आवाज में कहा कि वे ओबामा प्रशासन को करदाताओं के धन का इस्तेमाल पाकिस्तान को एफ-16 लड़ाकू विमानों की बिक्री के लिए नहीं करने देंगे.

सीनेट की शक्तिशाली विदेश संबंधों की समिति के अध्यक्ष और सीनेटर बॉब कोरकर ने कहा कि वह पाकिस्तान को लड़ाकू विमान देने के लिए अमेरिकी सब्सिडी पर से ‘पकड़’ नहीं छोड़ने वाले.

दूसरे देशों को की जाने वाली सैन्य बिक्री इसी समिति के अधिकार क्षेत्र में आती है.

कोरकर ने सीनेट में कहा, ‘इस समय इस बिक्री को मदद पहुंचाने के लिए किसी भी करदाता के डॉलरों का इस्तेमाल करने का मेरा विरोध जारी है क्योंकि पाकिस्तान आतंकी समूहों को पनाहगाह उपलब्ध करवा रहा है और अमेरिकी सैनिकों पर हमला बोलने वाले एवं अफगानिस्तान के भविष्य को खतरे में डालने वाले हक्कानी नेटवर्क को निशाना बनाने से इंकार करता है.’

कोरकर ने कहा, ‘‘करदाता सब्सिडी पर रोक लगाकर पाकिस्तान को एक जरूरी संदेश दिया जा सकता है कि उसे अपने रवैया बदलने की जरूरत है. लेकिन अमेरिकी विमान की खरीद से रोकने पर अच्छे से ज्यादा बुरा हो जाएगा क्योंकि तब रूस और चीन जैसे देशों के लिए पाकिस्तान को बिक्री करने का रास्ता खुल जाएगा और आतंकवाद-रोधी कदमों में वृहद सहयोग भी अवरूद्ध हो जाएगा.’

रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रह चुके सीनेटर रैंड पॉल ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ‘फ्रेनेमी’ है..इसका अर्थ यह है कि यह आंशिक तौर पर मित्र (फ्रेंड) और बहुत हद तक शत्रु (एनेमी) है.

उन्होंने कहा, ‘यदि पाकिस्तान वास्तव में हमारा सहयोगी बनना चाहता है, यदि पाकिस्तान वाकई चरमपंथी इस्लाम के खिलाफ युद्ध में मदद करना चाहता है तो उसे किसी रिश्वत की जरूरत नहीं होनी चाहिए. उसे हथियारों की बिक्री में सब्सिडी के लिए अमेरिकी करदाता की जरूरत नहीं होनी चाहिए. उनके पास पहले ही 70 एफ-16 हैं। उनके पास एफ-16 विमानों की एक वायुसेना है.’
 
एक ऐसे समय पर जबकि अमेरिका खुद 19 खरब डॉलर के कर्ज में हैं, तब सीनेटर पॉल ने अमेरिकी करदाता के धन से 30 करोड़ डॉलर से भी ज्यादा राशि से पाकिस्तान को आठ नए एफ-16 विमान खरीदने में मदद करने पर सवाल उठाया.

सीनेट की विदेश मामलों की समिति की पूर्व, दक्षिण एशिया, मध्य एशिया और आतंकवादरोधी मामलों पर बनी उपसमिति के रैंकिंग सदस्य और सीनेटर क्रिस मर्फी ने आरोप लगाया कि चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई में पिछले 10 साल में पाकिस्तान एक ‘अविसनीय सहयोगी’ रहा है.

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानियों ने मदरसों, धार्मिक स्कूलों और विदेशी वित्तपोषण को कम करने के लिए लगभग कुछ नहीं किया। ये ऐसे संस्थान हैं, जो असहिष्णु धार्मिक शिक्षण के केंद्र बन जाते हैं.

उन्होंने कहा, ‘हमने बीते दशक में पाकिस्तान को 15 अरब डॉलर दिए हैं. फिर भी उनके पिछले राष्ट्रपति ने माना कि पाकिस्तान ने तालिबान को हथियार दिए और मदद दी.’

उन्होंने कहा, ‘आपको वह तालिबान याद होगा, जिसने अफगानिस्तान में एक दशक तक बिन लादेन को शरण और पोषण दिया. पाकिस्तान ने उनकी मदद की. पाकिस्तान उन दो देशों में से एक था, जिन्होंने तालिबान को मान्यता दी.’

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