समुद्री लेनों के तनाव और प्रतिद्वंद्विता से मुक्त होने का भारत ने आह्वान किया

Apr 29, 2016

चीन की बढ़ती सामुद्रिक आक्रामकता पर चिंता के बीच भारत ने गुरुवार को नौवहन की आजादी का आह्वान करते हुए कहा कि संचार के समुद्री लेनों को तनाव और प्रतिद्वंद्विता से मुक्त होना चाहिए.

प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़े द्वीप पापुआ न्यू गिनी (पीएनजी) के दो दिवसीय दौरे पर आए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, ”भारत इस बाबत खुद को किसी देश के प्रतिस्पर्धी के तौर पर नहीं देखता.” उन्होंने यह भी कहा कि भारत पीएनजी के साथ सुरक्षा सहयोग कायम करने के मामले में किसी के साथ प्रतिस्पर्धा में शामिल नहीं है.

‘पोस्ट कूरियर’ अखबार को दिए इंटरव्यू में प्रणब ने कहा कि संचार की सभी समुद्री लेन तनाव एवं प्रतिद्वंद्विता से मुक्त होनी चाहिएं.

वह प्रशांत क्षेत्र में चीन की मजबूत होती सैन्य मौजूदगी की पृष्ठभूमि में पीएनजी और भारत के बीच सुरक्षा सहयोग के भविष्य के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे.

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रशांत द्वीपीय देशों के जल क्षेत्रों एवं अनन्य आर्थिक क्षेत्रों (ईईजेड) में तस्करी, अवैध रूप से मछली पकड़ने, मानव तस्करी, नशीली दवाओं की तस्करी जैसी गैर-कानूनी गतिविधियों में इजाफा हुआ है, जिससे इन देशों की अर्थव्यवस्था एवं राजनीतिक सुरक्षा पर असर पड़ता है.

राष्ट्रपति ने कहा, ”हम पापुआ न्यू गिनी और प्रशांत द्वीपीय देशों के ईईजेड को सुरक्षित बनाने और आपदा चेतावनी एवं आपदा कम करने में उनकी मदद करने में सहयोग के लिए तैयार हैं . हम पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए भारतीय उपग्रहों की ओर से विकसित उपग्रह तस्वीरों को साझा करने और अपनी उपग्रह प्रणाली के इस्तेमाल से हर देश के प्राकृतिक संसाधनों को मापने में मदद के लिए तैयार हैं.”

उन्होंने कहा, ”आज पूरी दुनिया और भारत एवं पापुआ न्यू गिनी के लिए समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद और समुद्री डकैती बड़ी चुनौतियां हैं.”

राष्ट्रपति ने कहा कि जयपुर में हुए फिपिक-2 (फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स को-ऑपरेशन) शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने पापुआ न्यू गिनी सहित प्रशांत द्वीपीय देशों को एक तटीय निगरानी रेडार प्रणाली की पेशकश की थी. भारत ने तटरक्षक पोत मुहैया कराने की भी पेशकश की थी.

आज सुबह यहां पहुंचे राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी गई और उनका भव्य स्वागत किया गया. उन्होंने कहा कि विकासशील देशों के साथ भारत के रिश्ते ”दोहन करने वाले नहीं हैं, बल्कि विकासात्मक हैं.”

राष्ट्रपति ने ”वसुधैव कुटुंबकम” को भारतीय कूटनीति का मार्गदर्शक सिद्धांत करार दिया. उन्होंने कहा, ”हमारे यहां एक प्राचीन कहावत है ‘वसुधैव कुटुंबकम’…यह दर्शन सभी दूसरे देशों के साथ हमारे संबंधों का मार्गदर्शन करता है.”

 

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