मेडिकल बोर्ड के गठन का गर्भपात के लिए आदेश: सुप्रीम कोर्ट

Jul 23, 2016

सुप्रीम कोर्ट ने 24 सप्ताह के असामान्य भ्रूण के गर्भपात की अनुमति मांगने वाली याचिका पर मुंबई के केईएम अस्पताल को मेडिकल बोर्ड के गठन का आदेश दिया है.

26 वर्षीय बलात्कार पीड़िता ने गर्भपात की अनुमति मांगी है.

जस्टिस जगदीश सिंह केहर और अरुण मिश्रा की बेंच ने मुंबई स्थित किंग एडर्वड मेमोरियल कालेज एंड हस्पिटल में महिला की शुक्रवार तक जांच करने और सोमवार तक सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा.

अदालत ने कहा कि महिला की हालत के बारे में मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का मूल्यांकन किया जाए और यदि जरूरत पड़े तो कुछ निर्देश जारी किए जाएं.

बेंच ने कहा कि महिला की ओर से पेश हुए वकील कोलिन गोंजालवेस यह सुनिश्चित करें कि महिला अपनी जांच के लिए शनिवार सुबह दस बजे तक अस्पताल पहुंच जाए.

सलीसीटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि केंद्र अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्स्थान (एम्स) में एक मेडिकल बोर्ड गठित करने को तैयार है जहां महिला की जांच की जा सकती है.

 

गोंजावलेस ने कहा कि मुंबई में मौजूद महिला की हालत बहुत खराब है और वह दिल्ली सफर करने में सक्षम नहीं होंगी. अदालत ने कहा कि इन मामलों में देरी घातक होती  है.

इसमें कोई देर नहीं होनी चाहिए. अदालत ने कहा कि कानून के एक बड़े मुद्दे को अलग से निपटाया जाएगा. बेंच ने कहा कि यह मुद्दा साधारण नहीं है. इसे अलग से निपटाया जाएगा. अपनी याचिका में महिला ने आरोप लगाया है कि शादी का झूठा वादा कर उसके पूर्व मंगेतर ने उससे बलात्कार किया और वह गर्भवती हो गई.

उसने 20 हफ्ते बाद गर्भपात पर रोक संबंधी मेडिकल टर्मिनेशन अफ प्रेगेंसी एक्ट, 1971 की धारा 3(2)(बी) को रद्द करने के लिए निर्देश देने की मांग की क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करता है. याचिका में दलील दी गई है कि इस तरह की पाबंदी अतार्किक, मनमानीपूर्ण, कठोर, भेदभावपूर्ण और जीवन एवं समानता के अधिकार का उल्लंघन करने वाली है.

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