ये हैं फार्क नक्सली, जगलों में कुछ ऐसी थी इनकी ज़िन्दगी

Feb 08, 2017
ये हैं फार्क नक्सली, जगलों में कुछ ऐसी थी इनकी ज़िन्दगी

पिछले साल कोलंबिया की सरकार और फार्क विद्रोहियों के बीच हुये शांति समझौते से करीब 50 सालों से चला आ रहा खूनी संघर्ष अब समाप्त हो चूका है। अब तक करीब 6000 विद्रोहियों ने हथियार डाल दिए हैं और अब सामान्य जीवन जीने के लिए जंगलों से अपने घर जा रहे है। सरकार इनको आर्थिक मदद भी कर रही है। इन्हें कोलंबिया का नक्सली कहा जाता था।

जिस तरह से भारत में नक्सलवादी अपने हक़ के लिए लड़ रहे थे उसी तरह ये कोलंबिया नक्सली भी अपने हक़ के लिए लड़ रहे थे। विद्रोही हजारों की तादात में घने जंगलों डेरा डाले हुए थे, जो छिपकर सैनिकों पर हमला करते थे। इन विद्रोहियों के समूह को ‘द रिवॉल्यूशनरी आर्म फोर्सेज ऑफ कोलम्बिया’(फार्क) नाम से जाना जाता है। फार्क कम्युनिस्ट पार्टी की सशस्त्र शाखा थी। फार्क मार्क्‍सवादी-लेनिन विचारधारा से प्रेरित समूह है।


हवाना में नवंबर 2012 से ही शांति समझौते पर बातचीत चल रही थी। इसी साल जून में दोनों पक्ष संघर्ष को खत्म करने पर राजी हुए थे। फार्क मार्क्‍सवादी की स्थापना 1964 में हुई थी। ये सरकार की ग्रामीण इलाकों में भेदभाव की नीतियों से खफा थे। सशस्त्र विद्रोही समूह में तकरीबन 7 हजार लड़ाके थे। इन्हें सक्रिय इलाकों में गांव वालों का भी सपोर्ट था।

कंबोडिया मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2002 तक विद्रोहियों की संख्या तकरीबन 20 हजार हो चुकी थी।
इनके मुख्य ‘दुश्मन’ कोलंबिया की पुलिस और आर्मी ही थी। विद्रोही लड़ाके पुलिस स्टेशन, सेना की पोस्ट को निशाना बनाते थे।

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