देश की कई नदियों के नक्शे में तो निशान हैं, मगर पानी का नामो-निशान नहीं : मोदी

May 15, 2017
देश की कई नदियों के नक्शे में तो निशान हैं, मगर पानी का नामो-निशान नहीं : मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां सोमवार को देश की नदियों की हालत पर चिंता जताते हुए कहा कि कई नदियों के नक्शे में तो निशान हैं, मगर पानी का नामो-निशान नहीं है, कई तो इतिहास के गर्त में समा गई हैं, मगर मध्यप्रदेश की सरकार और जनता समय रहते नदियों के संरक्षण के लिए सजग हो गई।

मध्यप्रदेश में चल रही नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा के समापन समारोह के मौके पर नर्मदा नदी के उद्गमस्थल अनूपपुर जिले के अमरकंटक में जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “देश की कई नदियां सिर्फ नक्शों पर बची हैं, केरल की एक नदी जिसका नाम ‘भारत पूजा’ है, यह नदी बचेगी भी या नहीं, कह नहीं सकते। यह हाल पानी के उपयोग के कारण नहीं हुआ है। नदी की रक्षा के लिए जिन तत्वों पर रक्षा का दायित्व होता है, वे जब नहीं निभाते हैं, तब मानव जाति को बड़ा नुकसान होता है।”

उन्होंने कहा कि चूंकि नर्मदा नदी ग्लेशियर से नहीं निकलती, यह पौधों के प्रसाद से प्रगट होती है, इसलिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाकर इसकी रक्षा करने का कोई विकल्प नहीं है।

मोदी ने कहा, “हम ऐसा कर्म करें कि आने वाली पीढ़ियां हमें याद रखें, जैसे कि आज हम अपने पुरखों का याद करते हैं। जैसे नदियों ने पुरखों को जीवन दिया, उसी तरह हम भी नदियों को जीवन दें।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2022 में नया भारत बनाने का सपना लेकर चलना है, हर हिंदुस्तानी को जोड़ना है, आजादी के आंदोलन में जैसे देश जुड़ गया था, देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए नया भारत बनने के लिए हर देशवासी को जोड़ना है।

उन्होंने वर्ष 2022 में आजादी के 75 वर्ष पूरे होने की याद दिलाते हुए कहा, “2022 में आजादी के 75 साल पूरे हो रहे हैं, क्या हिंदुस्तान के सवा सौ करोड़ देशवासी हर पल उस वर्ष (2022) का स्मरण नहीं कर सकते, जिन महापुरुषों ने अपना जीवन देश के लिए लगा दिया, जवानी जेल में काट दी, फांसी के तख्ते पर चढ़ गए। क्या उनके सपनों को याद करते हुए हम यह संकल्प नहीं ले सकते कि हमें क्या करना है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने नर्मदा सेवा यात्रा को नदी संरक्षण का दुनिया का बड़ा अभियान करार देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व सरकार व जनता की हिस्सेदारी की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने मध्यप्रदेश में प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए अपनाए जा रहे तौर-तरीकों की सराहना करते हुए कहा कि इससे अन्य राज्यों को सीखना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारे यहां कहा जाता है जो एक साल का सोचता है, वो अनाज बोता है और जो भविष्य का सोचता है वह फलदार वृक्ष बोता है। ये फलदार वृक्ष आने वाले समय में कई परिवारों के लिए अथरेपार्जन की गारंटी भी बन जाते हैं।”

उन्होंने कहा, “मध्यप्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के संरक्षण अभियान को लेकर जो कार्ययोजना बनाई है, उसमें हर व्यक्ति के लिए काम है, हर जगह के लिए काम है, कब करना और कैसे करना है, उसका विधि-विधान है, कौन किस काम को देखेगा, इसका ब्यौरा है, एक हिसाब से यह फ्यूचर विजन का परफेक्ट डॉक्यूमेंट है।”

मोदी ने कहा कि वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहेंगे कि वह कार्ययोजना की किताब अन्य राज्यों को भी भेजें, ताकि वे प्राकृतिक संसाधन की रक्षा का तरीका क्या होता है, उसे उदाहरण के तौर पर लेकर अपने-अपने राज्य में योजना बनाकर लागू करें।

उन्होंने कहा, “जल ही जीवन है, नदी माता है, यह तो कहते हैं, मगर हमारी सारी अर्थव्यवस्था उसी पर आधारित होती है। उसके बिना अर्थव्यवस्था खोखली हो जाती है, मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर 20 प्रतिशत पहुंची तो उसमें सबसे बड़ा योगदान नर्मदा का है।”

उन्होंने कहा, “नदी संरक्षण का लगभग 150 दिन का इस तरह का अभियान दुनिया के किसी और देश में चला होता, तो उसकी दुनियाभर में चर्चा हो रही होती। मीडिया इस अभियान के पीछे भागा भागा जाता, मगर इस यात्रा के साथ ऐसा नहीं हुआ, यह हमारा दुर्भाग्य है।”

स्वच्छता अभियान की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जन-भागीदारी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। जनभागीदारी की उपेक्षा कर कोई भी सरकार सफल नहीं हो सकती। इसका उदाहरण मध्यप्रदेश है, जो स्वच्छता के क्षेत्र में पीछे था, लेकिन ²ढ़ संकल्प और जनभागीदारी से आज देश में सबसे आगे है। देश के 100 स्वच्छ शहरों में मध्यप्रदेश के 22 शहर शामिल हैं।

‘नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा’ की पूर्णता के मौके पर मुख्यमंत्री शिवराज ने नर्मदा सेवा मिशन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री को नर्मदा सेवा मिशन की कार्ययोजना-2017 सौंपी।

नर्मदा सेवा यात्रा 11 दिसंबर, 2016 को नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से उद्गमस्थल अमरकंटक से शुरू हुई थी। 148 दिन चली इस यात्रा ने लगभग साढ़े तीन हजार किलोमीटर का रास्ता तय किया।

इस यात्रा के दौरान लोगों को ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ का संकल्प दिलाया गया, नर्मदा में गंदे पानी को जाने से राकने की योजना बनी और नर्मदा से पांच किलोमीटर की दूरी तक की शराब की दुकानें बंद की गईं।

सरकार ने तय किया है कि नर्मदा नदी के दोनों तटों पर एक-एक किलोमीटर तक फलदार पेड़ों के पौधे लगाए जाएंगे और पहले तीन वर्ष तक सरकार किसानों को मुआवजा देगी, क्योंकि इन पेड़ों में फल कम से कम तीन साल बाद ही फलेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी विशेष विमान से 12 बजकर 26 मिनट पर डुमना विमान तल पर उतरे। हेलीकॉप्टर के जरिए लगभग डेढ़ बजे अमरकंटक पहुंचे। प्रधानमंत्री के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी थे। अमरकंटक पहुंचने के बाद मोदी ने नर्मदा नदी की पूजा-अर्चना की और मंदिर में दर्शन किए। उसके बाद जनसभा को संबोधित किया और अमरकंटक से हेलीकॉप्टर से जबलपुर पहुंचे। जबलपुर से प्रधानमंत्री विशेष विमान से दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गए।

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