फिर 1700 से अधिक दवाएं स्वास्थ्य मंत्रालय की जांच के घेरे में

Mar 17, 2016

स्वास्थ्य मंत्रालय करीब 1700 और दवाओं के सेफ और असरदार होने की जांच कर रही है. वह यह देख रही है कि क्या इनकी मार्केटिंग की मंजूरी बनाए रखी जा सकती है.

इसका जिम्मा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) एवं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों को सौंपा गया है. यहां पर फार्माकोलॉजी यूनिट के एर्क्‍सपट्स मार्केट से इन दवाओं के नमूनों को एकत्रित कर जांच करने में जुट गए हैं.

एम्स के भेषज विज्ञान विभाग के एक एनालिस्ट ने बताया कि लिए गए नमूने यदि गुणवत्ता और दुष्प्रभाव के मापदंड पर खरे नहीं उतरते हैं तो दवाओं पर रोक लगाने पर विचार किया जाएगा. यह तय है कि इससे फार्मा इंडस्ट्री को जबरदस्त झटका लग सकता है. सरकार ने पिछले हफ्ते ही 300 दवाओं पर पाबंदी लगाई है. इस मामले में कुछ दवा कंपनियों को कोर्ट से राहत मिली है. एक अनुमान के मुताबिक 300 दवाओं पर पाबंदी से लोकल फार्मा इंडस्ट्री की बिक्री 3 हजार करोड़ रुपए कम हो सकती है. कई दवा कंपनियां सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही हैं.

आईसीएमआर में एक्पर्ट कमेटी के सदस्य डा. एनसी जोशी ने कहा कि दवाओं पर रोक लगाने का फै सला कानूनी आधार पर सही है. उन्होंने कहा कि बेतुके कॉम्बिनेशन के साथ इन दवाओं को बेचा जा रहा था. उन्होंने कहा कि सिस्टम को क्लीन करना जरूरी है. भारत की पहचान ऐसे देश के तौर पर नहीं होनी चाहिए जो बेतुके कॉबिनेशन वाली दवाएं बनाता है. दवाओं की जांच बीते कई महीनों से चल रही है. हम विश्लेषण करने के अन्तिम चरण में जल्द ही पहुंचेंगे.

पाबंदी से पहले हर तरह के तथ्य जुटाना जरूरी : वैज्ञानिक टीम के एक अन्य सदस्य ने कहा कि हमें हर दवा के लिए सबूत जुटाने पड़ते हैं. फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन को देखना पड़ता है. उसके बाद साइंटिफिक नजरिए से उसकी जांच की जाती है. किसी भी दवा पर तभी रोक लगाई जाती है, जब उसे लोगों के लिए असुरक्षित पाया जाता है. 1700 दवाओं की जांच चल रही है. इसके अलावा, सरकार 500 एप्लिकेशंस के डेटा की पड़ताल कर रही है. इससे पता चलेगा कि ये दवाएं सेफ हैं या नहीं. दवाओं के रिएक्शन मसलन एलज्रेट्स व अन्य दुष्प्रभाव की हर पहलुओं पर थाह ली जा रही है.

 

ये कुछ काम्पलेक्स कॉम्बिनेशंस हैं. इनकी शुरूआती जांच में कुछ एरिया के लिए सबूत मांगे गए हैं. हम भारत और विदेश से भी सबूत जुटा रहे हैं. इसके लिए दिल्ली सरकार के औषध नियंत्रक विभाग के साथ ही हर राज्य के औषध नियंत्रक के संपर्क  में हैं. इन सूचनाओं को जुटाने में 5 से 8 महीने का समय लग सकता है. विशेषज्ञ यह देख रहे हैं कि तीन से पांच ड्रग्स को मिलाने पर क्या होता है.

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