16 साल में सबसे भयंकर सूखा ,पानी पर मॉडल लॉ लाने का प्लान कर रही सरकार!

Apr 19, 2016

नई दिल्ली : देश में वर्षों से चली आ रही लापरवाहियों के कारण देश आज गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। कई हिस्सों में टेम्परेचर 40 डिग्री पार हो चुका है। वहीं, महाराष्ट्र के कई इलाके सूखे की चपेट में हैं। भारत में पानी को लेकर बीते 16 साल में सबसे बुरे हालात हैं।

वाटर रिसोर्स और रिवर डेवलपमेंट सेक्रेटरी शशि शेखर के अनुसार हालात और खराब हों, इसके पहले सरकार वाटर मैनेजमेंट के नए तौर-तरीके बनाने का प्लान कर रही है।
सरकार किसानों को ड्रिप इरिगेशन के लिए फंड देगी। साथ ही ग्राउंड वाटर के ज्यादा दोहन के लिए पेनल्टी लगाई जाएगी। इसके लिए एक मॉडल वाटर लॉ बनाया जाएगा। शशि शेखर के अनुसार 2000 के आंकड़ों को देखें तो हर शख्स को 2,000 क्यूबिक मीटर/ईयर पानी मिलता था।

ये आंकड़ा वर्ष 2016 में घटकर 1500 क्यूबिक मीटर/ईयर पर आ गया है। शशि शेखर आगे कहते हैं है की 15 साल बाद और बुरे हालात होंगे। एक आदमी को महज 1100 क्यूबिक मीटर/ईयर पानी में गुजारा करना होगा। एक आदमी को 1500 क्यूबिक मीटर/ईयर पानी की खपत पर चीन वाटर क्राइसिस डिक्लेयर कर चुका है।

आपको बता दे की पिछले 2 वर्षो में मानसून अच्छा नहीं रहा है। देश के ज्यादातर रिजर्वायर में काफी कम पानी बचा है। शशि शेखर के अनुसार क्राइसिस कई वर्षो से चली आ रही है। पानी के पारंपरिक रिसोर्स को
सहेज कर नहीं रखा गया। खेती के साथ इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ती जा रही है।

इसके चलते ग्राउंड वाटर खत्म हो रहा है।सूखे से बुरी तरह प्रभावित इलाकों में ट्रेन से पानी पहुंचाया गया है। इन हालात में भी ये बहस चल रही है कि शुगर मिलों या बियर बनाने के लिए पानी दिया जाए या पीने के लिए बचाया जाए।

मॉडल लॉ क्या होगा?

शशि शेखर के अनुसार सरकार ग्राउंड वाटर रूल्स में सुधार करने जा रही है। अगले 15 दिन में हम मॉडल लॉ तैयार कर लेंगे। वाटर मैनेजमेंट राज्य का सब्जेक्ट होता है। हम मॉडल लॉ का फ्रेमवर्क बनाकर उन्हें देंगे। अब ये उन पर होगा कि वे उसे मानते हैं या नहीं। जिन इलाकों को पानी की कमी के चलते ‘डार्क जोन’ डिक्लेयर किया गया है, वहां पानी के यूज की लिमिट तय होगी।

डार्क जोन वे इलाके हैं जहां ग्राउंड वाटर की जितनी तेजी से खपत हो रही है, उतनी तेजी से उसका रिर्सोस बढ़ नहीं रहा। डार्क जोन में कुएं की खुदाई और इलेक्ट्रिक पंपों को रेग्युलेट किया जाएगा। बदले रूल के अनुसार जैसे हालात खराब होंगे, रिस्ट्रिक्शन्स लागू हो जाएंगे।

ठीक नहीं नदियों की हालत भी :-

शशि शेखर के अनुसार हमें देश का रिवर मैनेजमेंट भी सुधारना होगा। इसमें आप नदियों से मिलने वाला पानी, उसकी इकोनॉमी और कंडीशन को रख सकते हैं। बड़ी बात ये है कि नदियों को हमने पूरी तरह इग्नोर कर दिया है। काफी नदियां सूख चुकी हैं। उनका फ्लो ठीक नहीं होगा तो ग्राउंड वाटर कैसे रिचार्ज होगा। मॉडल लॉ में सरफेस वाटर की तुलना में ग्राउंड वाटर की भूमिका ज्यादा अहम होगी।

बिगड़े हालात में ग्राउंड वाटर ही साथ देगा। यदि हम इसमें सुधार कर पाए तो पूरे साल के लिए काफी पानी होगा। पीने का 85 पर्सेंट पानी ग्राउंड वाटर रिसोर्स से मिलता है। लेकिन डेवलपमेंट प्रॉसेस में हम ग्राउंड वाटर को ही इग्नोर कर रहे हैं।

वाटर मैनेजमेंट ऐसे होगा :-
शेखर के अनुसार महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान और कर्नाटक में वाटर मैनेजमेंट शुरू किया जाएगा। हमें किसानों का माइंडसेट बदलना है। उन्हें ज्यादा पानी खाने वाली फसल उगाने से दूर कर डेवलपमेंट प्रॉसेस के बारे में बताना है। अब पानी के समान डिस्ट्रीब्यूशन पर विचार कर रहे हैं। उम्मीद है, साल के अंत तक इस पर कैबिनेट की मुहर लग जाएगी।

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