आधी रात को घरों से बहार निकली महिलाएं, कहा ”मेरी रातें, मेरी सड़क”

Aug 16, 2017
आधी रात को घरों से बहार निकली महिलाएं, कहा ”मेरी रातें, मेरी सड़क”

रात में अकेली लड़की का बाहर घूमना तो दूर, किसी ज़रूरी काम से भी बहार निकले तो उसका सुरक्षित रहना बहुत ही मुश्किल हो गया है। क्योंकि अंधेरी सड़कों पर घूमते दरिंदे उन्हें अपनी हवस का शिकार बना लेते हैं। जिसके बाद यही कहा जाता है कि रात को लड़की घर से बाहर निकली ही क्यों थी, और ऐसे ही चंडीगढ़ छेड़छाड़ मामले में भी कहा गया कि बारह बजे रात को लड़की अकेली घर से बाहर थी क्यों..??

लेकिन इन सब बातों को पीछे छोड़ते हुए लड़कियां भी रातों में सड़क पर निकलना चाहती हैं, वो भी ये महसूस करना चाहती हैं, कि रात की खूबसूरती क्या होती है। रात में सुनसान सड़कें कैसी होती हैं, और इसी लिए देश की लड़कियां आधी रात को सड़क पर ये कहते हुए निकल पड़ीं, कि “मेरी रातें, मेरी सड़क”

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देश के कई हिस्सों में दिल्ली, मुंबई, बनारस समेत कई हिस्सों में ये कैंपेन चल रहा है। बनारस की सड़कों पर लड़कियां अपने हाथों में तख्तियां लिए आधी रात को सड़क पर निकलीं, और बीएचयू लंका से शुरू हुआ ये महिलाओं का मार्च अस्सी घाट पर रात साढ़े बारह बजे जाकर खत्म हुआ। उसके बाद यहां पर उन्होंने समय बिताकर ये मांग की, कि ‘जैसे लड़के यहां आधी रात को महफूज बैठे हैं ऐसे ही लड़कियों को भी बैठने का अधिकार मिलना चाहिए।’

बता दें कि वर्णिका कुंडू के साथ हुए हादसे के बाद फेसबुक पर ‘मेरी रातें, मेरी सड़क’ के नाम से कैंपेन चलाया जा रहा है । जिसके तहत देश भर के महिलाएं रात को सड़क पर उतरीं और उन्होंने उस पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती दी है। इस कैंपेन में शामिल हुई महिलाओं ने कहा ‘ये समाज महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है, लेकिन महिलाओं ने सड़क पर निकलकर ये बता दिया है कि, रात और सड़क उनकी भी उतनी ही है, जितनी पुरुषों की है।’ जहाँ देश भर में ये कैपेंन चल रहा है और लड़कियां और महिलायें आधी रात को सड़कों पर निकल कर यही कह रही हैं ‘मेरी रात मेरी सड़क।’

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