हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के बाहर रहने की समय सीमा तय होनी चाहिए: मेनका गाँधी

Mar 07, 2017
हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के बाहर रहने की समय सीमा तय होनी चाहिए: मेनका गाँधी

महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के सन्दर्भ में बेहद विवादित बयान दिया है। मेनका गांधी का कहना है कि हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के बाहर रहने की समय सीमा तय होनी चाहिए। जो की बेहद जरूरी है, क्योंकि 16-17 साल की उम्र में लड़कियों में हार्मोनल चेंज आते हैं। जिस कारण उन्हें लक्षमण रेखा लांघने में ज़रा भी हिचक नही होती।

मेनका गाँधी के इस बयान के बाद से सोशल मीडिया पर मामला गर्म है जहाँ एक तरफ जमकर इस बयान की निंदा हो रही है वही कुछ लोग उन्हें लौकी की सब्जी खाकर हार्मोन्स कण्ट्रोल करने की सलाह दे रहे है। एक चैनल के कार्यक्रम में मेनका ने कहा कि हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों के बाहर रहने की समय सीमा तय होनी चाहिए। उन्होंने ये कहा कि ये बेहद जरूरी है, क्योंकि यह उनकी सुरक्षा और उनके हार्मोंस से जुड़ा है।

दरअसल, कार्यक्रम में लड़कियों ने कहा कि हॉस्टल से देर रात तक लाइब्रेरी तक भी जाने की परमिशन नहीं मिलती है। इस पर मेनका गांधी ने कहा कि 16-17 साल की उम्र में आपमें हार्मोनल चेंज आते हैं। इसलिए ये लक्ष्मण रेखा बनाई गई है। ये आपकी सुरक्षा के लिए ही है। तब लड़कियों ने सवाल किया की लड़कों के साथ ऐसा क्यों नहीं किया जाता है। तो इस पर मेनका गांधी ने कहा कि ये कर्फ्यू स्टूडेंट्स को एक्सीडेंट जैसे बाहरी दुर्घटनाओं से बचाने के लिए है। मेनका ने कहा, जो भी परिवार अपनी बेटी या बेटे को कॉलेज भेजता है, मैं उसकी सुरक्षा की उम्मीद करती हूं। इसलिए सुरक्षा के कुछ नियम उनके खिलाफ हो सकते हैं।

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