‘प्रतीकवाद’ को लेकर बीजेपी के दलित नेता पासवान ने पार्टी पर साधा निशाना

Jun 16, 2016

ऐसे समय में जब भाजपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दलितों को अपने साथ जोड़ने की कवायद में जुटी है, पार्टी की अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व प्रमुख संजय पासवान ने इसकी रणनीति में त्रुटि को रेखांकित किया.

उन्होंने कहा है कि संगठन को ‘शब्दाडंबर’ और उस समुदाय के लोगों के साथ बैठने, खाने और मिलने के ‘प्रतीकवाद’ से आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि वे ‘समानता’ चाहते हैं, दया नहीं.

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का दलित साधुओं के साथ बहु प्रचारित ‘कुम्भ स्नान’ और उत्तर प्रदेश में उस समुदाय के लोगों के साथ भोजन ग्रहण करने की एक तरह से आलोचना करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य संजय पासवान ने इन्हें अदूरदर्शी कवायद करार दिया जो दलितों को चिढ़ाने का काम करते हैं क्योंकि ऐसे मुद्दे अब उनके लिए प्रसांगिक नहीं रहे.

ये भी पढ़ें :-  अखिलेश को एक और झटका: विजय मिश्रा साईकिल छोड़ हाथी पर हुये सवार

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को दलितों के मसीहा बी आर अम्बेडकर को सम्मानित करने से आगे बढ़ना चाहिए और अगर पार्टी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में दलितों के बीच अपनी पैंठ बढ़ाना चाहती है तब उसे बसपा के संस्थापक कांशी राम और पूर्व उपप्रधानमंत्री जगजीवन राम के योगदान को स्वीकार करना चाहिए.

संजय पासवान ने कहा, ”सभी तरह के शब्दाडंबर जारी हैं. हम दलितों के लिए ऐसा करेंगे, हम वैसा करेंगे. हम उनके साथ खाना खायेंगे और उनके साथ नहायेंगे. यह अब प्रासंगिक नहीं रहा. मंदिर में प्रवेश, उनके साथ खाना खाने जैसी कवायद लोगों के मन में नहीं है. यह उन्हें चिढ़ाने का काम करता है. यह अदूरदर्शी है.”

ये भी पढ़ें :-  मोदी जहां भी जाते हैं, झूठे वादे करते हैं : राहुल गांधी

भाजपा नेता ने कहा, ”लोग समझते हैं कि प्रतीकवाद से दलित खुश हो जायेंगे. ऐसा नहीं है. दलितों की नयी पीढ़ी की आकांक्षाए अलग है.”

शाह का नाम लिये बिना उन्होंने पीटीआई भाषा से कहा कि हमें दलितों के साथ बैठने, खाना खाने या मिलने के कदम से आगे बढ़ना चाहिए. दलित अब केवल वोट बैंक नहीं हैं लेकिन सोच के बैंक (थॉट बैंक) हैं. इनके संबंध में समानता के बारे में बात होनी चाहिए और दया की नहीं.

उन्होंने बसपा के संस्थापक कांशी राम जैसे नेताओं के योगदान को रेखांकित करने की वकालत की.

पासवान ने कहा कि सरदार पटेल भी ‘हमारे’ नहीं थे और यहां तक कि उन्होंने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया लेकिन अब पार्टी ने उनके कायरे को आगे बढ़ाया है.

ये भी पढ़ें :-  अखिलेश का काम बोलता है-पांच साल में कराए पांच सौ दंगे

उन्होंने कहा, ”अगर आप कांशी राम को अपनाना नहीं चाहते हैं तब कम से कम उनका त्याग नहीं करना चाहिए. कम से कम उनके कार्यों, भाषणों की जिक्र ही कर दें.”

उन्होंने याद दिलाया कि जब वह अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रमुख थे तब उन्होंने भाजपा कार्यालय में कांशी राम की तस्वीर लगाई थी लेकिन उनके जाने के बाद फोटो को हटा दिया गया.

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

 

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>
error: 24hindinews.com\'s content is copyright protected
error: 24hindinews.com\'s content is copyright protected