सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई कड़ी फटकार

Apr 08, 2016

केंद्र सरकार ने देश के 11 राज्‍यों में सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की मदद के लिए दायर याचिका पर गुरुवार को एक हलफनामा सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर किया.

इस मामले में जिरह के लिए एडिशनल सॉलीसिटर जनरल के मौजूद न रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी व्‍यक्‍त करते हुए केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के रवैये पर भी सवाल उठाए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र ने कोर्ट से इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से एएसजी के न होने पर जिरह के लिए एक सप्‍ताह के अतिरिक्‍त समय की मांग की. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए केंद्र से पूछा कि आपके पास कितने लॉ ऑफिसर हैं.

कोर्ट ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र की ओर से कोर्ट में एएसजी नहीं है तो क्‍या हम लोग बैठे रहें और घडी देखते रहें? आप बताएं हम क्या करें और क्यूं करें? क्या हमारा काम एएसजी के इंतजार में बैठे रहना और घडी देखना है? लीगल प्रोसेस फॉलो करना जरुरी है, मगर केंद्र सरकार इस पर गंभीर नहीं है.

यही कारण है कि केंद्र सरकार का पक्ष रखने के लिए एएसजी कोर्ट में मौजूद नहीं है. क्‍या सूखा की समस्‍या केंद्र सरकार के लिए गंभीर मामला नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के कुछ समय बाद ही एएसजी पिंकी आनंद कोर्ट के समक्ष उपस्‍थित हुई. उन्‍होंने बताया कि वह किसी अन्‍य कोर्ट में अन्‍य मामले में जिरह में व्‍यस्‍त थी। जिसकी वजह से वह यहां नहीं आ पाई। अब वे उक्‍त मामले को बीच में छोड़ कर आई हैं। वह अदालत के समक्ष कुछ समय के लिए मौजूद रहकर अपना पक्ष रखने को तैयार है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सही नहीं है। अगर आप इस कोर्ट में रहती हैं तो आपको पूरा समय देना होगा. अदालत एक निश्‍चित समय के लिए सुनवाई नहीं कर रही है. अगर वे केंद्र सरकार की ओर से पक्ष रखती है तो अदालत के समक्ष उन्‍हें पूरा पक्ष देकर ही अदालत से जाना होगा.

अदालत कुछ देर के लिए उन्‍हें नहीं सुन सकती है. इस पर एएसजी पिंकी आनंद ने कहा कि उनका एक महत्‍वपूर्ण मामला अन्‍य अदालत में लंबित है, इस वजह से वे आज पूरा समय दे पाने में सक्षम नहीं हैं.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पहले उन तीन राज्‍यों (हरियाणा, बिहार और गुजरात) का पक्ष पहले सुन लेते हैं, जिन्‍होंने अभी तक अपने यहां पर सूखा घोषित नहीं किया है. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले बिहार सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा.

बिहार सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि उनके यहां पर कोई सूखा नहीं पड़ा है और न ही सूखे जैसे कोई हालात हैं. बिहार में अगर पर्वतीय क्षेत्रों नेपाल इत्‍यादी जगहों पर अत्‍यधिक बरसात हो जाती है तो बिहार में बाढ़ आ जाती है.

इसके अतिरिक्‍त अगर पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून के दौरान औसत से कम बारिश होती है तो बिहार की नदियों में सामान्‍य गति से पानी बहता है। अगर मानसून में सामान्‍य बरसात भी होती है तो बिहार की नदियों का पानी खतरे के निशान के ऊपर बहने लगता है. ऐसे में वहां पर सूखा पड़ने की कोई संभावना ही नहीं है. यह कहते हुए बिहार सरकार की ओर से अपनी दलीलों को पूरा कर दिया गया.

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हरियाणा सरकार ने एक हलफनामा दायर किया. इस हलफनामे को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने जो हलफनामा दिया है, उसमें आधी-अधूरी जानकारी है और बरसात और भूजल संबंधी विवरण तक नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि क्या ये गंभीरता है जो आप इस मुद्दे पर दिखा रहे हैं. हम बात कर रहे हैं उन लोगों की जो सूखे की वजह जान गवां रहे हैं. हम हरियाणा में पिकनिक या रोडवेज में सवारी की बात नहीं कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को भी सूखा मामले में आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब राज्‍य सरकार को सितंबर में पता लग गया था कि सूखे के हालात हो सकते हैं तो आपने अब 1 अप्रैल को सूखा क्यों घोषित किया. आप बता सकते हैं कि इस दौरान लोगों के साथ क्या हुआ होगा. इस पर गुजरात सरकार ने कहा कि ये देरी स्थानीय चुनाव की वजह से हुई है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर चुनाव होंगे तो क्या सारा काम बंद हो जाएगा. आपकी लापरवाही की वजह से ये हालात हुए क्योंकि राज्य की रिपोर्ट के बाद ही केंद्र टीम भेज सकती है. अब आपने सूखा घोषित किया है तो केंद्र टीम भेजेगी यानी पहले ही देरी हो चुकी है. अगर आप छह महीने की देरी से सूखा घोषित करेंगे तो लोगों को समय पर राहत कैसे मिलेगी.

केंद्र सरकार की ओर से एएसजी पिंकी आनंद ने कहा कि हमारे यहां ड्रॉट मैनुअल है. जिसके तहत हम राज्‍यों को सूखाग्रस्‍त होने पर राहत संबंधी अनुदान जारी करते हैं. हमें राज्‍य सरकारें बताती है तो हम सूखा मानते है.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्‍या आप राज्‍य सरकार पर आंख मूंद कर विश्‍वास कर लेते हैं. आपका कोई तरीका तो होगा राज्‍य सरकार की बात को क्रास चेक करने का. इस पर केंद्र सरकार ने कहा कि उनके पास अपने तरीके भी हैं। जहां पर सूखा संबंधी शिकायतें आती है तो केंद्र सरकार खुद भी उसकी जांच कराती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अप्रैल को होगी.

 

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