तीन तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इंकार: कहा- ‘केन्द्र सरकार संसद में बनाए कानून’

Aug 22, 2017
तीन तलाक़ पर सुप्रीम कोर्ट का दखल देने से इंकार: कहा- ‘केन्द्र सरकार संसद में बनाए कानून’

मुसलमानों में प्रचलित एक बार में तीन तलाक पर चल रही महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान आज सुप्रीम कोर्ट ने विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस पर छह महीने की रोक लगा दी, और केंद्र सरकार से कहा है कि इस मामले में केंद्र सरकार संसद में कानून बनाए।

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने तीन तलाक पर 6 दिन तक मैराथन सुनवाई करके गत 18 मई को फैसला महफूज़ रख लिया था। आपकी जानकारी के लिए ये बात बता दें कि इस मामले की शुरुआत उस वक्त हुई थी जब ‘उत्तराखंड’ के काशीपुर की शायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन की संवैधानिकता अर्जी दायर कर चुनौती दी थी।

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इस बारे में कोर्ट के फैसले से पहले तीन तलाक की पीड़िता और याचिकाकर्ता ‘शायरा बानो’ ने कहा कि, ‘मुझे लगता है कि ये फैसला मेरे पक्ष में आएगा। क्योंकि अब समय बदल गया है और एक कानून जरूर बनाया जाएगा।’ दूसरी तरफ पूर्व अटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि, ,यह एक बड़ा दिन है, देखते हैं कि क्या फैसला आता है।’

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संविधान पीठ ने एक बार में तीन तलाक की वैधानिकता पर बहस सुनी। इस पीठ की खास बात ये है कि, इसमें पांच अलग-अलग धर्मों के अनुयायी शामिल हैं। हालांकि यह बात कोई माने नहीं रखती क्योंकि न्यायाधीश का कोई धर्म नहीं होता। कोर्ट ने शुरुआत में इस बात को साफ़ कर दिया था कि वह अभी ‘एक बार में तीन तलाक पर ही विचार कर रहा है।’ जबकि ‘बहुविवाह और निकाह हलाला’ पर बाद में विचार किया जाएगा।

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