सड़कों का है बुरा हाल, जोश में कांवड़ियों का रेला

Jul 25, 2016

देवताओं के घर में सावन का मेला सजा है। सुलतानगंज से बाबा बैधनाथ की नगरी, करीब सौ किलोमीटर, के रास्ते पैदल जोशीले कावड़ियों का रैला शुरू हो चुका है। दुकानें और स्वयंसेवी संस्थाओं के शिविर जगह-जगह लगे है। प्रशासनिक तैयारियों के दावे किए जा रहे है मगर सड़कों का हाल बुरा है। 20 जुलाई से सावन का महीना शुरू हो गया है। 19 जुलाई को भागलपुर के सुलतानगंज में बिहार के काबीना मंत्री मदनमोहन झा ने मेले का उदघाटन किया। भागलपुर के कमिश्नर और आइजी ने पूरे अमले के साथ सुलतानगंज पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उनके साथ भागलपुर, बांका, मुंगेर और रेल एसपी भी मौजूद थे।

दरअसल सुलतानगंज से देवघर का सौ किलोमीटर का रास्ता भागलपुर, मुंगेर, बांका और देवघर जिलों से गुजरता है। शनिवार को इस संवाददाता ने इन रास्तों का मुआयना किया। कावड़ियों के पैदल रास्ते पर तो मिट्टी बिछाई जा रही थी। चापाकल मरम्मत किए जा रहे थे। रोशनी का बंदोबस्त किया जा रहा था। मगर बारिश के मौसम की वजह से मिट्टी पर बालू नहीं डालने से फिसलन बन गई है। पैदल चलने वाले कांवड़ियों को अभी से दिक्कत हो रही है। सिक्किम से आए कांवड़िए लांबा बहादुर से मुलाकात असरगंज के नजदीक हुई। वह बोले फिसलन की वजह से चलने में परेशानी हो रही है। इनके साथ 30 लोगों का काफिला है, जिसका ध्येय सावन के पहले सोमवार को बाबा को जल अर्पण करना है।

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हिफाजत के ख्याल से आइजी सुशील मानसिंह खोपडे ने नक्सली इलाके से गुजरने वाले रास्ते पर सीआरपीएफ और एसटीएफ के जवानों को तैनात करने की हिदायत दी है। कमिश्नर अजय कुमार चौधरी बताते हंै कि पीएचडी महकमा पीने के पानी और शौचालय के इंतजाम में लगा है। मगर भागलपुर से सुलतानगंज 25 किलोमीटर और भागलपुर से हंसडीहा 75 किलोमीटर का रास्ता एकदम बदहाल है। भागलपुर से देवघर बाया अमरपुर इकलौता रास्ता सड़क का है। इस पर भी जहां तहां बड़े बड़े गड्ढों के साथ आधी सड़क रोक लंबी कतार में खडेÞ जान लेवा ट्रक आफत बने हुए हंै। वजह यह है कि थाने में तैनात पुलिसवाले पैसे वसूल नो एंट्री खोल देते हंै। यह रोजाना का हाल है। व्यवस्था चौपट है।

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गेरुआ वस्त्र पहने कंधे पर कांवड़ और उसमें गंगा जल बांध बोलबम का जैकारा लगाते कांवड़िए देवघर पहुंच बाबा का जलाभिषेक करते हैं। सुलतानगंज में आकर गंगा उत्तरवाहिनी हुई। इसी कारण यहां जल भरने की आस्था जुड़ी है। कांवड़ में लगे घुंघरू और घंटी टुनटुन की मीठी आवाज पैदल चलनेवाले कांवड़ियों को बड़ी राहत देते हंै। चार-पांच दिनों की पैदल यात्रा कर कांवड़िए बाबा के मंदिर पहुंच 22 मंदिरों की पूजा अचर्ना करते हैं। बाबा रावणेवर नाथ, माँ पावर्ती, गणेश, भैरोनाथ, हनुमान, मनसा मां, सरस्वती, सूर्य देवता, बंगला मां, मां तारा, महालक्ष्मी, अन्नपूर्णा, काली, सीताराम, भुवनेश्वरी, लक्षमीनारायण, गंगा आदि मंदिर यहां हैं।

कांवड़ियों के सैलाब को नियंत्रित रखने के लिए देवघर प्रशासन की एक महीना नींद उड़ी रहती है। आखिरी दबाव देवघर पर ही आता है। यहां खानेपीने की चीजों के दाम आसमान पर चढ़े हंै। इस पर देवघर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। बिजली की आँख- मिचौली से यहां के वाशिंदे परेशान हंै। मार्केटिंग यार्ड मोहल्ले के गोपाल प्रसाद शर्मा और विजय कुमार शर्मा बताते हंै कि सावन आने पर बिजली के तार कसे जा रहे हैं। पहले किसी को कुछ नहीं दिखता। गंदगी का हाल भी बुरा है। गंदगी का हाल तो सुलतानगंज में भी बुरा ही है।
एक अनुमान के मुताबिक यहां से रोजाना एक लाख कांवड़िए जल भर देवघर प्रस्थान कर रहे है। चारों ओर बोल बम का नारा है, बाबा एक सहारा है के नारों से माहौल गुंजायमान है। देवघर में तो रात-दिन का फर्क खत्म है। बाजार एक महीने 24 घंटे खुले रहेंगे। मंहगाई तो चरम पर है। कीमतों पर प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है। एक पराठा 45-50 रुपए। चावल के साथ दाल गायब है। सब्जी के दाम भी ऊंचे हैं।

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देवघर प्रशासन की पूरी ताकत दर्शनार्थियों को हिफाजत के साथ देवघर से विदा करने में ही लगी है। अलबत्ता रेलवे ने देवघर से सुलतानगंज बाया भागलपुर स्पेशल पैसेंजर ट्रेन चलाई है। मेले के सरकारी इंतजामात की असलियत का पता मेला श्रीगणेश के एक हफ्ता बाद ही चलेगा।

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