ATS विनोद भट्ट का चौकाने वाला खुलासा, मैं जानता हूँ सभी बेगुनाह हैं, पर मैं मजबुर हूँ, ऊपर से दबाव है अपराधी साबित करने को

May 18, 2017
ATS विनोद भट्ट का चौकाने वाला खुलासा, मैं जानता हूँ सभी बेगुनाह हैं, पर मैं मजबुर हूँ, ऊपर से दबाव है अपराधी साबित करने को

2006 में मुंबई में हुए सीरियल बम ब्लास्ट्स मामले में गिरफ्तार हुये अब्दुल वाहिद शेख। वो उस समय एक स्कूल में पढ़ाते थे। गिरफ्तारी के बाद अब्दुल 9 सालों तक जेल में रहे। 2015 में कोर्ट ने उन्हें बेगुनाह करार देते हुये बाइज्ज़त बरी कर दिया। अब्दुल ने अपनी 9 सालों की आपबीती पर एक किताब लिखी है. किताब का नाम है ‘बेगुनाह कैदी’ रखा है।

अब्दुल ने किताब में लिखा है कि, “वो लोग कानूनी और गैरकानूनी दोनों तरीकों से नारको टेस्ट करते थे। गैरकानूनी तरीके से वो जेल के डॉक्टर से हमें इंजेक्शन दिलवाते और सवाल पूछते। शुरू में हमें ख़ुशी हुई कि हम बेगुनाह है तो अब सच पता चल जाएगा। लेकिन ऐसा न हुआ कानूनी टेस्ट में उन्होंने सीडी के साथ ही छेड़छाड़ कर दी.”

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आगे का वाकिया लिखते है कि हमसे बैंगलोर में हुए नारको टेस्ट में मुझसे पूछा गया कि पांच के बाद कौन सा नंबर आता है। जब सीडी आई तो उसमें मेरे जवाब से पहले सवाल था की ‘कितने पाकिस्तानी तुम्हारे घर आये थे। इसी तरह एक और आरोपी साजिद के साथ भी खेल हुआ उससे पूछा गया कि टीवी कैसे चलता है साजिद का जवाब था रिमोट से जब सवाल बदल कर पूछा गया कि ‘बम कैसे एक्टिवेट हुआ’ अब्दुल एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड के ‘टॉर्चर सेल’ के बारे में लिखते है उन साउंडप्रूफ कमरों में कैदियों को नंगा छोड़ दिया जाता था. एसी फुल पर चला के, उनके निप्पल्स और गुप्तांगों पर बिजली के शॉक दिए जाते है।

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इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, पुलिस उन्हें ही उठाती थी, जो पहले से ही किसी केस में फंसे होते थे। अब्दुल को एक बार प्रतिबंधित संगठन सिमी से गठजोड़ होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तब से वो लिस्टेड शामिल थे। हालांकि उस केस में भी उनको छोड़ना पड़ा था।

अब्दुल वाहिद शेख के किताब में एटीएस ऑफिसर विनोद भट्ट जिक्र है। विनोद भट्ट को लेकर कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। अब्दुल, विनोद भट्ट जानते थे कि पकड़े गए सभी लोग बेगुनाह हैं। उन्होंने कहा था कि वो सबको बचा लेंगे लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनकी रहस्यमयी हालत में मौत हो गई थी उनकी लाश रेलवे ट्रैक पर पाई गई थी।

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किताब के एक चैप्टर में एसीपी भट्ट की एक आरोपी एहतेशाम सिद्दीकी के साथ की बातचीत का जिक्र है। एसीपी भट्ट ने एहतेशाम से कबूल किया था कि वो जानते हैं सभी आरोपी बेगुनाह हैं. लेकिन उनको मजबूर किया जा रहा है कि वो उनको अपराधी साबित करे। अब्दुल वाहिद कहते हैं कि ये बाते उनकी मौजूदगी में हुई थी। अब्दुल की किताब उर्दू में है जल्द ही उसका इंग्लिश ट्रांसलेशन उपलब्ध होगा।

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