पुलिसकर्मियों को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली क्लीन चिट: इशरत जहां

Mar 12, 2016

सुप्रीम कोर्ट ने इशरत जहां एनकाउंटर मामले में गुजरात के पुलिसकर्मियों पर दर्ज आपराधिक मामले खत्‍म करने की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी.

कोर्ट ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि जेल में बंद लश्कर-ए-तैयबा के सरगना डेविड हेडली के हालिया बयान के आधार पर इशरत जहां के वर्ष 2004 में हुए कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में गुजरात पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक अभियोजन, निलंबन और अन्य कार्रवाई को रद्द कर दिया जाए.

इस मामले में वकील एम एल शर्मा की ओर से दलीलें शुरू किए जाने के कुछ ही मिनट बाद न्यायाधीश पी सी घोष और न्यायाधीश अमिताव रॉय की पीठ ने कहा, ‘‘अनुच्छेद 32 का क्या उद्देश्य है. आप इसके तहत ऐसा मामला दायर नहीं कर सकते. यदि आप चाहें तो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट जा सकते हैं.’’

जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण की मांग की तो पीठ ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह याचिका को उसके गुण-दोष के आधार पर खारिज नहीं कर रही.

पीठ ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले में तत्कालीन डीआईजी डी जी वंजारा समेत इस मामले में प्रभावित गुजरात पुलिसकर्मियों के लिए रिहाई की खातिर अदालत का रूख करने का रास्ता खोलते हुए कहा, ‘‘कोई भी संबंधित व्यक्ति उचित प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है.’’

गुजरात पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को निरस्त करने की मांग करने वाली इस याचिका में पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी हेडली के हालिया बयान का हवाला दिया गया है. मुंबई की एक अदालत के समक्ष दर्ज किए गए इस बयान में कहा गया था कि इशरत लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ी थी.

मुठभेड़ में कथित भूमिका के चलते पूर्व पुलिस अधिकारी वंजारा समेत गुजरात पुलिसकर्मी मुंबई की एक अदालत में मुकदमे का सामना कर रहे हैं.

मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमलों के लिए लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर कथित तौर पर साजिश रचने वाले हेडली की ओर से दर्ज हालिया बयानों का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया कि इस समय तथ्य निर्विवादित हैं कि गुजरात पुलिस ने इशरत जहां समेत जिन चार लोगों को मारा था, वे सभी आतंकी थे.

याचिका में कहा गया, ‘‘लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर 26/11 को मुंबई में हुए हमलों की साजिश रचने वाले डेविड हेडली के वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से मुंबई की विशेष अदालत के समक्ष दर्ज कराए गए बयान और न्यायिक कार्रवाई में यह कहा गया है कि जून 2004 में गुजरात पुलिस ने इशरत जहां समेत जिन चार लोगों को मार डाला था, वे पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा नामक आतंकी संगठन से जुड़े थे और उन्हें गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या का काम सौंपा गया था.’’

 

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