थाईलैंड की जनता ने जुंटा के नए संविधान पर जनमत संग्रह में डाले वोट

Aug 08, 2016

थाईलैंड की जनता ने जुंटा समर्थित नए संविधान पर हो रहे जनमत संग्रह में रविवार को मतदान किया.

यह संविधान अगले साल के चुनावों के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकता है. हालांकि आलोचकों को आशंका है कि इससे सत्ता पर सेना की पकड़ मजबूत हो सकती है.
लगभग पांच करोड़ मतदाता एक सवाल का जवाब ‘हां’ या ‘नहीं’ में देंगे. सवाल यह है कि क्या आप संविधान का मसविदा स्वीकार करते हैं? इसके अलावा एक पूरक प्रश्न भी पूछा गया है. यह सवाल है कि नियुक्त सीनेट को प्रधानमंत्री के चयन में निचले सदन के साथ मिलने की अनुमति होनी चाहिए या नहीं?
यदि अधिकतर मतदाता ‘हां’ कहते हैं तो यह मसविदा संविधान बन जाएगा. इससे सेना की सरकार को चुनाव में शामिल होने की वैधता मिल जाएगी. प्रधानमंत्री प्रयुथ चान-ओचा ने अगले साल चुनाव करवाने का वादा किया है. प्रयुथ ने 2014 के तख्तापलट का नेतृत्व किया था.
मतदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जनमत संग्रह के परिणामों की घोषणा की जाएगी.
प्रधानमंत्री प्रयुथ और अन्य प्रमुख सरकारी हस्तियों ने कुछ दिन पहले खुले तौर पर यह घोषणा की थी कि वे रविवार के जनमत संग्रह में मतदान करते हुए ‘हां’ का विकल्प चुनेंगे.
वर्ष 2014 में तख्तापलट के बाद सत्ता संभालने वाली सेना जुंटा ने देश की ‘राजनीति को साफ’ करने के लिए देश का संविधान दोबारा लिखने का आह्वान किया था. जनमत संग्रह थाई राजनीति में एक निर्णायक दिन साबित हो सकता है.
इसके जरिए न सिर्फ नवरचित संविधान का भविष्य तय होगा, बल्कि इसका परिणाम सेना द्वारा गठित नेशनल काउंसिल फॉर पीस एंड ऑर्डर जैसी कई इकाइयों और विभिन्न दलों के नेताओं के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.
यदि संविधान को इस जनमत संग्रह में मंजूरी नहीं मिलती है तो क्या होगा, इस बात को लेकर अनिश्चितता है, लेकिन सैन्य सरकार का नियंत्रण बना रहेगा.
सैन्य अधिकारी जिस तरह से जनमत संग्रह करवा रहे हैं, मानवाधिकार समूह उसकी निंदा करते रहे हैं. क्योंकि इसके तहत प्रचार अभियान चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. जिसके चलते दर्जनों लोगों को हिरासत में लिया गया है और उनपर आरोप तय किए गए हैं.
इसका नतीजा यह है कि लोगों के बीच में संविधान के मसविदे के बारे में सीमित जानकारी है.
सैन्य सरकार ने वादा किया है यदि इसे मंजूर कर लिया जाता है तो अगले साल चुनाव हो सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक सरकार बहाल हो जाएगी.
लेकिन आलोचकों की दलील है कि मसविदा सैन्य नियंत्रण को स्थायी बनाए रखेगा क्योंकि भविष्य में चुनी जाने वाली सरकारों को लेकर निर्णायक प्रभाव सैन्य बलों और नियुक्त सीनेट के हाथ में ही रहेगा.
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