कैबिनेट ने अध्यादेश को दी मंज़ूरी, एक साल के लिए NEET टला

May 20, 2016

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने शुक्रवार को एनईईटी के तहत एक साथ देश भर में मेडिकल परीक्षा लिये जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ एक अध्यादेश को स्वीकृति दे दी है.

NEET पर राज्यों के विरोध को देखते हुए राज्यों के बोर्ड को एक साल तक NEET से राहत देने का फ़ैसला लिया गया है. शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में NEET को एक साल तक टालने के लिए अध्यादेश लाया गया.

सूत्रों के मुताबिक़ कैबिनेट ने इसे पास कर दिया है और अब इसे राष्ट्रपति के पास मंज़ूरी के लिए भेजा जाएगा.

सरकारी सूत्रों के हवाले से खबर दी गई है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्य बोर्डों को एक सामान मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के दायरे से एक साल के लिए बाहर रखने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दी है.

सूत्रों के अनुसार, इस अध्यादेश को हस्ताक्षर व मंजूरी के लिए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेजा जायेगा, जिसके बाद इसे जारी कर दिया जायेगा.

सूत्रों के अनुसार, अध्यादेश में इस साल एक साथ पूरे देश में मेडिकल भर्ती परीक्षा लेने को टालने का निर्णय लिया गया है, जिससे वैसे छात्र जो हिंदी, अंग्रेजी के अलावा क्षेत्रीय भाषाओं में पढाई करते हैं उन्हें लाभ होगा.

यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के 28 अप्रैल के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें  एनईईटी के तहत एक साथ पूरे देश में मेडिकल-बीडीएस परीक्षा लेने का आदेश दिया गया था. अध्यादेश के अनुसार, 24 जुलाई को अब केवल एक साथ निजी कॉलेजों की मेडिकल परीक्षा होगी, राज्य बोर्डों को इससे छूट मिलेगी.

इस फैसले के खिलाफ दक्षिणी राज्यों सहित महाराष्ट्र व गुजरात जैसे राज्यों के दलील थी कि एनईईटी यानी राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा के तहत एक साथ परीक्षा लेने से उनके यहां के बच्चे पिछड़ जायेंगे, क्योंकि वे क्षेत्रीय भाषाओं में तैयारी करते हैं.

हाल में संसद के सत्र में भी यह मामला उठा था. दो दिन पहले इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक हुई थी, उसमें भी राजनीतिक दलों ने कहा था कि कम से कम एक साल के लिए इससे बच्चों को छूट मिलनी चाहिए. एनईईटी के तहत अंग्रेजी या हिंदी में परीक्षा लिये जाने की बात कही गयी है.

हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह छूट इस साल सिर्फ राज्य सरकारों के मेडिकल कॉलेजों में परीक्षा देने में मिलेगी. जबकि निजी कॉलेजों की परीक्षा एकीकृत ढंग से एनईईटी के तहत ही होगी.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश में अकादमिक सत्र 2016-17 के लिए एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों की अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कराने की इजाजत मांगने वाली राज्य सरकारों और अल्पसंख्यक संस्थानों की याचिकाओं को नौ मई को खारिज कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने 28 अप्रैल के उस आदेश को संशोधित करने से इनकार कर सभी भ्रम को दूर कर दिया था, जिसमें इसने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा के जरिए एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए एकल साझा प्रवेश परीक्षा कराने की केंद्र और सीबीएसई को इजाजत दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने एक मई के ऑल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट (एआइपीएमटी) को एनइइटी माने जाने के लिए केंद्र, सीबीएसइ और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया( एमसीआइ) द्वारा अपने समक्ष रखे गए कार्यक्रम को मंजूरी दी थी.

 

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