मुसलमानों ने दी भाईचारे की गजब मिसाल, सिखों के लिए खोल दिए मस्‍जिद के दरवाजे और कहा-‘पकाओ खाना और लगाओ लंगर’

Dec 29, 2017
मुसलमानों ने दी भाईचारे की गजब मिसाल, सिखों के लिए खोल दिए मस्‍जिद के दरवाजे और कहा-‘पकाओ खाना और लगाओ लंगर’

एक तरफ जहां देश में गंदी सियासत के जरिये हिंदू-मुस्लिम सिख-ईसाई के नाम पर इस देश को बांटने की कोशिश की जा रही है। लेकिन आज भी यहाँ ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्होंने ये साबित कर दिया कि उनके अंदर अभी भी इंसानियत बाकी है।

बता दें कि भाईचारे की मिसाल पेश करने का ये मामला पंजाब के फतेहगढ़ साहिब का है। जहाँ के मुस्लिमों ने भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए सिखों को लंगर बनाने और बांटने के लिए अपनी मस्जिद के दरवाजे खोल दिए। इंडिया टाइम्स में आई खबर के मुताबिक, मुस्लिमों ने तीन दिवसीय शहीदी मेला के लिए सिखों को ऐतिहासिक लाल मस्जिद के परिसर में लंगर बनाने की मंजूरी दी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शहीदी मेला गुरु गोविंद सिह के छोटे साहिबज़ादास के शहीद होने पर मनाया जाता है। लाल मस्जिद बाद के मुगलकाल से ताल्लुक रखती है और यह सैफूद्दीन को समर्पित है जो कि शैख अहमद फारुकी सिरहिंदी के पौते थे। मुस्लिम समुदाय द्वारा दो साल पहले ही इस मस्जिद का पुन:निर्माण कराया गया था।

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इस मस्जिद के इंचार्ज से मंजूरी मिलने के बाद रंवान और बाथो गांव के लोगों ने इसके परिसर के अदंर लंगर लगाने का इंतजाम करना शुरू कर दिया। इस बारे में बात करते हुए रंवान गांव के निवासी चरनजीत सिंह छन्नी ने बताया कि “मुस्लिम समुदाय ने शहीदी मेले पर लंगर लगाने की इजाजत दे दी है। हम लोगों के लिए खाना बना रहे हैं और तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में लंगर बांट रहे हैं। इस मस्जिद के बेसमेंट का भी हमें इस्तेमाल करने दिया जा रहा है ताकि हम इसमें खाने की चीजों को रख सकें। दोनों गांव के गुरुद्वारों के जरिए इस लंगर को आयोजित किया गया है और स्थानीय निवासी यहां आकर अपनी-अपनी सेवा दे रहे हैं। यही वजह है कि इंचार्ज से इजाजत मिलने के बाद मुस्लिम भी काफी खुश हैं कि उन्होंने हमारे धर्म के कार्यक्रम के लिए अपनी जमीन उपयोग के लिए दी है।”

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वहीं इस बारे में पटियाला स्थित पंजाबी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर परमवीर सिंह ने बात करते हुए कहा कि “शैख सिरहिंदी द्वारा सिखों के पांचवे गुरु गुरु अर्जुन देव जी का उत्पीड़न करने में काफी अहम भूमिका रही थी। इसके बावजूद जब बंदा सिंह बहादुर सत्ता में आई तो उन्होंने मस्जिद को नहीं तुड़वाया। इसी तरह से जस्सा सिंह आहलुवालिया और दूसरे सिखों के समय पर भी हुआ जिन्होंने अफगान शासकों को हराया था।” उन्होंने आगे बताया कि “सिखों ने ऐसा इसलिए नहीं किया क्योंकि सिख मुस्लिमों या इस्लाम के खिलाफ नहीं थे। वे केवल मुगल शासकों के खिलाफ थे।” सिखों को लंगर बनाने और बांटने के लिए जगह देने पर लाल मस्जिद के इंचार्ज खलीफा सयैद मोहम्मद सादिक रज़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा “हमें खुशी है कि हम सिख समुदाय के काम आ सके। दूसरे धर्म के लोगों में अलग धर्म के लोगों के लिए कोई गलत धारणा नहीं है लेकिन सत्ता में बैठे लोग और राजनेता ही उनका बंटवारा करना चाहते हैं।”

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