पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम परिवार ने दी इंसानियत की मिसाल 4 अनाथ हिंदू बच्चों को लिया गोद

Dec 28, 2017
पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम परिवार ने दी इंसानियत की मिसाल 4 अनाथ हिंदू बच्चों को लिया गोद

एक मुस्लिम परिवार ने इंसानियत की मिसाल देते हुए एक हिन्दू परिवार के 4 अनाथ बच्चो को गोद लेने का फैसला किया। ये भाईचारे की मिसाल दक्षिण कश्मीर के लेवदोरा में देखने को मिली।

आपको बता दे कि बीते शनिवार को इन मासूम बच्चो की माँ बेबी कौल का निधन हो गया था। जबकि इन बच्चो के पिता का निधन एक साल पहले ही हो चूका था। इन बच्चो के पिता पेशे से एक कॉन्ट्रैक्टर थे, तथा डायबिटीज़ की बीमारी के काफी समय से मरीज़ थे। इन मासूम बच्चो की माँ के निधन के बाद ये 4 भाई बहन अनाथ हो गए। जिसमे सबसे बड़ी लड़की 16 साल की है तथा दूसरी लड़की 15 साल की है इन दोनों के छोटे भाई भी है एक भाई 15 साल का तथा दूसरा भाई 7 साल का है। इन अनाथ बच्चो के पास सिर्फ सर छुपाने के लिए एक छत बची है इसके अलावा इनके पास कुछ नहीं बचा।

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सरकार ने कौल को एडहॉक पर एक बैंक में नौकरी भी दी थी, जिससे वह अपने बच्चो की परविरश कर सके। बता दे की कौल का नौकरी मिलने के तीन महीने बाद ही निधन हो गया। जिससे बच्चो पर कम उम्र में ही दुखों का पहाड़ टूट गया। ऐसे में इन अनाथ बच्चो की मदद करने का फैसला गांव वालों ने किया।
बता दे कि ये हिंदू-मुस्लिम भाईचारा की एकता की कश्मीर की सदियों पुरानी कहानी है, ये हिंदू-मुस्लिम भाईचारा की एक वक्त पहले मिसाल भी दी जाती थी। इन अनाथ बच्चो की माँ के अंतिम संस्कार में गांव के सैकड़ों लोग शामिल हुए, तथा इतनी कम उम्र मे अपनी माँ का लड़के ने पूरे हिंदू रिति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया। अंतिम संस्कार करने के लिए गांव वालों ने हिंदू धर्म के लोगों से फोन पर पूरी जानकारी हासिल की।

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पड़ोस के ही रहने वाले मोहम्मद युसूफ ने बताया कि जब इन बच्चो के पिता का निधन हुआ था तो हम सब गांव वालों ने 80 हजार रुपये तथा 6 क्विंटल चावल इकट्ठा किए थे। सारे लोगो ने मिलकर बेटियों के नाम से दो अकाउंट भी खुलबाये थे जिसमे 55 हज़ार रूपये जमा किये थे। मोहम्मद युसूफ आगे बताते है कि हम सब लोगो ने मिलकर इनका घर भी ठीक कराया था अब हम इस नेक काम को दुबारा करना चाहते है इन बच्चो को गोद लेकर।

कौल के चार बच्चो में सबसे बड़ी बेटी मीनाक्षी है, मीनाक्षी ने बताया उसका भाई जब 9वी क्लास में था तभी उसने स्कूल छोड़ दिया था। उसकी छोटी बहन भी स्कूल में पढ़ाई करती है, तथा उसका सबसे छोटा भाई रोहित वो भी स्कूल में पढता है और वो तीसरी क्लास में है। रोहित अभी इस घटना को पूरी तरह से समझ नहीं पा रहा है। बच्चो ने अपने पिता का जिक्र करते हुए बताया की वो कभी भी गांव को छोड़ना नहीं चाहते थे। बच्चो ने बताया कि उनकी आंटी ने जम्मू के जगती गांव में उन्हें जाने को बहुत कहा, दरअसल बहुत सारे बेसाहारा लोग अब भी उस कैंप में रह रहे हैं,क्यूंकि सरकार वहां पर रह रहे परिवारों  को राहत की सामग्रियां उपलब्ध कराती है।

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