महिला हॉकी टीम की मिडफील्डर बेचती थी दूध, कैप्टन हैं टिकट कलेक्टर

Jul 13, 2016

छत्तीसगढ़: रियो ओलिंपिक के लिए मंगलवार को मेन्स और वुमन हॉकी टीम का एलान किया गया। हॉकी इंडिया ने सरदार सिंह की जगह लंदन ओलिंपिक में एक्स्ट्रा प्लेयर रहे पीआर श्रीजेश को मेन्स टीम का कैप्टन बनाया है। महिला टीम में शामिल रेणुका यादव की कहानी बिलकुल अलग है। उन्होंने यहां तक का सफर दूध बेचकर पूरा किया। कप्तान सुशीला तो मुंबई में टिकट कलेक्टर हैं। ब्राजील के रियो डी जेनेरो में 5 अगस्त से ओलिंपिक शुरू होगा।

महिला की हॉकी टीम में मिडफील्डर रेणुका यादव का भी नाम है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की रहने वाली 22 साल की रेणुका ने सीनियर टीम में फरवरी 2015 में जगह बनाई थी। यानि 17 महीने की मेहनत के बाद उन्हें ओलिंपिक टीम में जगह मिल गई। उनकी कहानी और भी स्पेशल इसलिए हो जाती है कि उन्होंने अपना यह सफर बड़े संघर्ष के बाद पूरा किया है। रेणुका का परिवार दूध बेचकर पेट पालता है। रेणुका भी इसमें हाथ बंटाती थीं। रोज शाम घर-घर दूध देने जाती थी। घंटों खड़े होकर दूसरों को हॉकी खेलते देखती थीं रेणुका रेणुका जब दूध पहुंचाने जाती तो बीच रास्ते में निगम का स्कूल मैदान पड़ता था। यहां बच्चे हॉकी खेलते। इन्हें देखकर वो रुक जाती और साइकिल के हैंडल में दूध का डिब्बा लटकाए घंटों हॉकी खेलते देखती। एक दिन उसने यहीं हॉकी की स्टिक थामी और हॉकी खेलना शुरू किया। वो बेहद गरीब परिवार से थी। मिडिल तक की पढ़ाई महारानी लक्ष्मी बाई स्कूल से हुई। यहीं से उसने स्टेट और नेशनल टूर्नामेंट खेला। इसके बाद 2009 में साई ग्वालियर ने रेणुका के खेल को देखकर उसे अकादमी में बुला लिया।
ऐसा रहा रेणुका का सफर…

2009 में बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई), ग्वालियर गईं। यहां से जूनियर महिला हॉकी टीम में शामिल हुई। स्कॉटलैंड में टीम को जीत दिलाई। जुलाई 2013 में उनका सीनियर इंडिया टीम के कैंप के लिए हुआ।

कौन हैं कप्तान सुशीला चानू…
36 साल बाद क्वालिफाई करने वाली टीम की कप्तान सुशीला मणिपुर की हैं। 8 साल से मुंबई में जूनियर टिकट कलेक्टर का काम कर रही हैं। साई की ग्वालियर अकादमी में ट्रेनिंग ले रही हैं।

सरदार से छिनी कप्तानी श्रीजेश के हाथ में:-

हॉकी इंडिया ने बड़ा फैसला लेते हुए सरदार सिंह की जगह पी श्रीजेश को मेन्स टीम का कैप्टन बनाया है। एस वी सुनील को मेन्स टीम और डिफेंडर दीपिका को महिला टीम का उपकप्तान बनाया गया है। श्रीजेश ओलिंपिक में भारत की कप्तानी करने वाले दूसरे गोलकीपर होंगे। दौड़ना पसंद नहीं था, इसलिए बने गोलकीपर श्रीजेश का जन्म 8 मई, 1986 को केरल के एक किसान परिवार में हुआ। स्कूल के कोच ने उन्हें हॉकी खेलने की सलाह दी। श्रीजेश ने यह सोचकर गोलकीपर बनने का फैसला किया कि दौड़ना नहीं पड़ेगा।

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