इस आठ साल के बच्चे ने तीन लड़कियों को मार डाला, देश में सबसे कम उम्र का सीरियल किलर

Oct 06, 2016
इस आठ साल के बच्चे ने तीन लड़कियों को मार डाला, देश में सबसे कम उम्र का सीरियल किलर
 यह कहानी है उस बच्चे की, जिसके माथे पर देश के सबसे कम उम्र का सीरियल किलर होने का दाग लगा है। बिहार के इस बच्चे ने तीन लड़कियों के सीरियल मर्डर को आज से आठ साल पहले अंजाम दिया तो देश ही नहीं दुनिया भी चौंक गई। जिस उम्र में बच्चे एक थप्पड़ से कांप जाते हैं, उस उम्र में कोई बच्चा तीन लड़कियों की हत्या कर दे तो है न…हैरानी भरी बात।  आप सवाल करेंगे कि पुरानी घटना को आज परोसने का क्या मतलब। दरअसल घर और समाज के सिस्टम से आज भी बालअपराधी पैदा हो रहे है। बात-बात पर चिड़चिड़े होते बच्चों के हिंसक हो जाने की घटनाएं अक्सर देखने-सुनने को मिल रहीं हैं। देश में हर साल औसतन 40 हजार बाल अपराधी सलाखों के पीछे पहुंच रहे हैं।  ऐसे में इस यंगेस्ट सीरियल किलर की केस स्टडी के साथ हम आपको आज रूबरू कराना चाहते हैं।
सिर्फ बिस्कुट की लड़ाई में उतार दिया लड़कियों को मौत के घाट
बिहार की राजधानी पटना से करीब डेढ़ सौ किमी दूर  बेगूसराय का एक गांव है भगवानपुर। वर्ष 2006 से  2007 के बीच हुए तीन मर्डर ने देश ही नहीं पूरी दुनिया को हिला दिया।  वजह ही ऐसी थी। कातिल था सात साल का बच्चा।  नाम राजदीप सदा(काल्पनिक नाम)। यह काल्पनिक नाम हम दे रहे क्योंकि कानून के मुताबिक नाबालिक अपराधियो का नाम उजागर नहीं किया जा सकता। अचानक उसकी अपनी एक साल की छोटी बहन से बिस्कुट को लेकर झगड़ा होता है तो वह भड़क उठता है। फिर बहन को घर से दूर खेत में ले जाकर ईंट से मारकर हत्या कर देता है। घर आकर बच्चा बताता है कि मैने दीदी को मार डाला। परिवार वालों के पैर के नीचे जमीन खिसक जाती है। मगर घर का मामला होने के कारण दबा के बैठ जाते हैं। दो महीने बाद यह लड़का और खूंखार हो उठता है इस बार न जाने क्या सोच कर अपनी आठ महीने की छोटी बहन को फिर उसी खेत में ले जाकर मार डालता है। फिर घर वाले पुलिस को खबर नहीं करते। जिससे इस बच्चे का दुस्साहस फिर बढ़ जाता है। मई 2007 में पड़ोसी की एक साल की लड़की खुशबू से न जाने क्या नाराजगी होती है कि उसे भी उसी खेत में ले जाकर मार डालता है। फिर सबको लेकर दिखाता है घटनास्थल।
बहलाफुसलाकर खेत में ले गया, ईंट मार कर दी हत्या
पुलिस को पूछताछ में उसने बताया कि एक-एक कर वह तीनों लड़कियों को गांव के खेत में लेकर गया। वहां ईंटों से कूंचकर हत्या कर दी। यह भी उसने बताया कि पहले वह गला दबाता था फिर ईंट से सिर पर मारकर हत्या कर देता था। इसके बाद पूरे गांव में घूम-घूमकर बोलने लगा कि मैने तीनों लड़कियों को मार डाला।
पुलिस ने पूछा क्यों मारा तो बोला खून देख अच्छा लगा
पुलिस को तब पता चला कि लड़का साइको हो गया है। जब उससे पूछा कि क्यों मार दिया तो कहा कि खून देख उसे बहुत अच्छा लगा। पुलिस ने पूछा कि क्यों  मार दिया तो बोला कि बिस्कुट के लिए। 30 मई 2007 को पुलिस ने गिरफ्तार कर बच्चे को बाल सुधार गृह भेज दिया। खास बात रही कि घर की दो लड़कियों की हत्या होने पर भी परिवार ने तहरीर नहीं दी। उनका कहना था कि घर के ही बच्चे ने दिमागी  संतुलन ठीक न होने पर हत्या कर दी। यह घर का मामला है फिर तहरीर क्या देना। मनौवैज्ञानिक कहते हैं कि मासूम बच्चे में पीड़ा में भी आनंद खोजने की प्रवृत्ति घर कर गई। इसे सेडिस्ट कहते हैं। बच्चा सीरियल किलर न बनता। अगर उसने जब पहली हत्या की तभी उसे सुधार गृह भेजा जाता।
NCRB:हर साल औसतन 40 हजार बाल अपराधी पकड़े जाते हैं
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों से बाल अपराध में इजाफा हो रहा है। घरों में गरीबी और मां-बाप का बच्चों की ठीक से देखभाल न होना इसका प्रमुख कारण है। हर साल औसतन 40 हजार बाल अपराधी छोटे से लेकर बड़े अपराधों में गिरफ्तार होते हैं। वर्ष 2014 में देश में कुल 48230 बाल अपराधी पकड़े गए। जिसमें 80 प्रतिशत बच्चे अपने घर रहते थे बाकी बेघर थे। छह प्रतिशत कैदी कई बार अपराध करने वाले रहे।
 सर्वे कहता है कि देश में तमाम अपराधों में पकड़े गए बाल अपराधियों में से 90 प्रतिशत बहुत गरीब परिवारों से होते हैं। पचास प्रतिशत के परिवार की सालाना आय 25 हजार से कम होती है। पेट पालने और ख्वाहिशों को पूरा करने के चक्कर में वे अपराध को शार्टकट समझ बैठते हैं।
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