हर उम्र के डॉक्टरों को परोसी जाती थी मैं

Apr 27, 2016

कानपुर। ‘उम्र कोई मायने नहीं रखती थी सर, हर रोज नए-नए डॉक्टर आते थे और मुझे उनके आगे परोस दिया जाता था। मुझे उनमें कोई अंतर नहीं दिखता था। सब एक से थे। मुझे सबके चेहरे भी एक जैसे लगते थे। सब हैवान थे। उनमें कोई फर्क नहीं था।’ इतना कह कर 450 लोगों के रेप का शिकार हो चुकी नाबालिग छात्रा फफक पड़ती है।

वह बताती है कि एसजीपीजीआई लखनऊ में कार्यरत नर्स सुशीला सचान शांति मेडिकोज नाम का नर्सिंग होम चलाने के नाम पर असल में गलत कार्यों व देह व्यापार का अड्डा चलाती थी। मामला दर्ज होने के बाद से नर्स सुशीला सचान फरार है।

लखनऊ पुलिस अब तक उसका कोई सुराग नहीं लगा पा रही है और इधर आठ माह तक रेप और गैंगरेप का शिकार हो चुकी कानपुर की यह नाबालिग छात्रा उस नर्क से मुक्त होने के बाद भी उन लम्हों को याद कर तिल-तिल जल रही है।

छात्रा के परिजन भी आरोपी नर्स के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगातार पुलिस से लगा रहे हैं। पीड़ित छात्रा ने बताया कि लखनऊ के जिस नर्सिंग होम में उसे रखा गया था और जहां उसके साथ रेप और गैंगरेप कराए जाते थे, वहां गर्भपात से लेकर तमाम तरह के गलत काम होते थे।

छात्रा का आरोप है कि जब उसके साथ अंदर रेप या गैंगरेप हो रहा होता था तो सुशीला सचान का एक रिश्तेदार जो शांति मेडिकोज का मालिक था, गेट के बाहर बैठा रहता था, ताकि बाहर से वह निगरानी रख सके। छात्रा और उसके परिजनों ने आरोपी नर्स व उसके रिश्तेदार की गिरफ्तारी की मांग की है।

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