भेद खुला तो उड़े कमिश्नर के होश! पैदाइशी ‘डॉक्टर’ हैं RBI गवर्नर राजन

Apr 30, 2016

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जन्मे RBI के गवर्नर रघुराम राजन के बर्थ सर्टिफिकेट को लेकर राजधानी की मीडिया में शुक्रवार को काफी हो-हल्ला मचा। हालात यहाँ तक हो गए कि जिस बर्थ सर्टिफिकेट को मुख्यमंत्री द्वारा राजन को सौंपा जाना था, उसके जारी होने से ही नगर निगम कमिश्नर को मुकरना पड़ा।

मीडिया के सामने आए आरबीआई गवर्नर के बर्थ सर्टिफिकेट में भोपाल नगर निगम ने एक बड़ी गलती कर दी। एक दिन में ही सारी प्रोसेस कर तैयार हुए इस बर्थ सर्टिफिकेट में नगर निगम ने राजन के जन्म नाम के आगे डॉक्टर लिख दिया। इतना ही नहीं राजन के सर्टिफिकेट बनवाने में भी रजिस्ट्रार ने प्रूफ नहीं देखा और डा. रघुराम राजन लिखकर बर्थ सर्टिफिकेट जारी कर दिया। इस गलती से ऐसा लग रहा है, मानो राजन जब पैदा हुए तब ही उन्हें डॉक्टर की उपाधि मिल गई हो!

इस बात को लेकर जब नगर निगम कमिश्नर छवि भारद्वाज से बात की गई तो उन्होंने ऐसे किसी सर्टिफिकेट के जारी होने से ही इनकार कर दिया। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर रजिस्ट्रार के साइन वाला ये सर्टिफिकेट आया कहां से? इसको जारी करने का मकसद क्या था?

भोपाल में 3 फरवरी 1963 को जन्मे राजन को CM शिवराज सिंह ने यह जन्म प्रमाण पत्र भेंट किया। RBI चीफ को यह सर्टिफिकेट 53 साल बाद मिला है। राजन का जन्म भोपाल में ही एक तमिल ब्राह्मण परिवार में हुआ था। राजन की माता का नाम मयथिली और पिता का नाम आर गोविंद राजन है।

रघुराम राजन के बर्थ सर्टिफिकेट में एक नहीं कई गलतियां भी हैं। रघुराम राजन खुद या उनके माता-पिता या संरक्षक ही बर्थ सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो राजन परिवार की तरफ से कोई आवेदन नहीं दिया गया। उनके सर्टिफिकेट में भोपाल का पता भी नहीं दिया गया। इसके अलावा उनका जन्म कौन से अस्पताल या संस्था में हुआ जिक्र नहीं किया गया।

सूत्रों के अनुसार आरबीआई गवर्नर का सर्टिफिकेट 28 अप्रैल को जारी हुआ है, जो एक दिन की ही प्रक्रिया में तैयार कर दिया गया। इसके अलावा आम नागरिकों को बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए काफी चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार तो एक माह से भी अधिक समय तक लोगों को सर्टिफिकेट का इंतजार करना पड़ता है। यदि उसमें कोई गलती हो गई तो उसे सुधरवाने के लिए भी एक से दो माह तक चक्कर लगाना पड़ता है। इसके अलावा कई प्रकार के कागजात भी लगाने पड़ते हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि नगर निगम चाहे तो आम लोगों को भी इतने कम समय में सर्टिफिकेट बनाकर दे सकता है। इसके लिए नगर निगम शुल्क भी लेता है। यदि जन्म के एक सप्ताह और एक माह के भीतर प्रमाण पत्र नहीं बनवा पाते हैं तो आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय से आदेश बनवाना कर नगर निगम ले जाना पड़ता है। इस काम में 15 से 20 दिन का समय और लग जाता है। इस प्रोसेस में जब आम नागरिक के लिए सर्टिफिकेट बनकर तैयार होता है तो उसे प्रूफ करने के लिए भी एक दिन बुलाया जाता है। उसके बाद फाइनल सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।

 

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