कैंटीन चलाते-चलाते ऐसे बने ‘यूसुफ खान’ से सुपरस्टार ‘दिलीप कुमार’, अभी तक कोई नहीं तोड़ पाया उनका यह रिकॉर्ड

Dec 11, 2017
कैंटीन चलाते-चलाते ऐसे बने ‘यूसुफ खान’ से सुपरस्टार ‘दिलीप कुमार’, अभी तक कोई नहीं तोड़ पाया उनका यह रिकॉर्ड

बॉलीवुड के सुपरस्टार और ‘ट्रेजडी किंग’ कहे जाने वाले अभिनेता दिलीप कुमार 95 साल के हो गए हैं। जिनका जन्म 11 दिसंबर,1922 को पेशावर पाकिस्तान में हुआ था। लेकिन उनके पिता देश के बंटवारे के बाद मुंबई आ गए थे। दिलीप कुमार का असल नाम यूसुफ़ ख़ान है। लेकिन फिल्मों में डेब्यू करने से पहले उन्होंने देविका रानी के कहने पर अपना नाम बदलकर दिलीप कुमार रखा था। वो ऐसे बॉलीवुड के सुपरस्टार अभिनेता नहीं बने बल्कि उनको यहाँ तक पहंचने में क्या क्या परेशानियों का सामना करना पड़ा उसकी एक झलक हम आपको दिखाते हैं।

बता दें कि अभिनेता दिलीप कुमार के पिता लाला गुलाम सरवर पेशावर में फलों का बिजनेस किया करते थे। मुंबई आने के बाद उनके पिता ने ड्राइ फ्रूट्स का बिजनेस करना शुरू किया। कुछ समय बाद उनके पिता ने अपनी पूरी फैमिली को पेशावर से मुंबई बुलवा लिया। जिसके बाद दिलीप कुमार ने मुंबई में ही अपनी पढ़ाई पूरी की। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पेशावार में दिलीप कुमार और राज कपूर पड़ोसी हुआ करते थे। अपने घर वालों के साथ दिलीप कुमार की ज़िन्दगी बहुत ही अच्छे से चल रही थी मगर एक दिन दिलीप कुमार की घरवालों के साथ किसी बात को लेकर अनबन हो गई। फिर किया था उन्होंने अपने घर को छोड़ने का फैसला कर लिया

अपने घर मुंबई को छोड़कर वो पुणे चले गए। और वहां जाकर वो एक कैंटीन में काम करने लगे। वहां कैंटीन में काम करते-करते कुछ समय गुज़रने के बाद उन्होंने खुद का कैंटीन खोल लिया। फिर किया था धीरे-धीरे उन्हें इस बिजनेस में सफलता मिलने लगी और उनका रिेलेशन घरवालों से भी बेहतर होने लगा। जिसके बाद उन्होंने अपने घर मुंबई वापस जाने का फैसला कर लिया। घर पहंचते ही उन्होंने अपने बिजनेस में कमाए सारे पैसे अपनी मां को दे दिए और मुंबई में काम ढूंढने लगे। कई दिन यहां-वहां भटकने के बाद एक दिन उनकी मुलाकत एक परिचित से हो गई। उसे उन्होंने बताया कि वे नौकरी की तलाश में है। जिसके बाद उनका परिचित उन्हें बॉम्बे टॉकीज की मालकिन देविका रानी के पास ले गया। यहां देविका रानी ने उन्हें 1250 रुपए महीना सैलेरी पर काम पर रख लिया। अभिनेता ने ये सोचा भी नहीं था कि उन्हें इतनी बड़ी सैलेरी मिलेगी क्योंकि उस जमाने में ये बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी।

ये अभिनेता की आदत थी कि वे हमेशा अप-टू-डेट रहते थे। और उनका लुक भी काफी अच्छा था। जो देविका रानी को काफी पसंद आ गया। एक दिन उन्होंने दिलीप कुमार से कहा कि वो एक नई फिल्म बना रही हैं, जिसमें उनको हीरो बनाने की बात कही। लेकिन देविका को उनका नाम ‘यूसुफ खान’ पसंद नहीं था। इसी लिए देविका ने उनको कुछ नाम सुझाए। इस तरह से वो ‘यूसुफ खान’ से दिलीप कुमार बन गए और अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत की।

जिसके बाद फिर उन्होंने अपने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हलाकि उनकी पहली फिल्म ‘ज्वार भाटा’ असफल रही। 1947 में आई उनकी पहली हिट फिल्म ‘जुगनू’ थी। उन्होंने अपने करियर में बॉलीवुड के कई स्टार्स के साथ काम किया है। इन्हीं में से एक बॉलीवुड के बिगबी यानि अमिताभ बच्चन हैं। इन दोनों एकमात्र फिल्म ‘शक्ति’ में एक साथ काम किया था। इस फिल्म के लिए दिलीप कुमार को बेस्ट एक्टर का फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिला था। एक वक्त ऐसा भी था जब अमिताभ बच्चन, दिलीप साहब का ऑटोग्राफ लेने के लिए रेस्टोरेंट के बाहर आधा घंटा तक खड़े रहे थे।

 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1953 में जब फ़िल्म फेयर पुरस्कारों की शुरुआत हुई तब दिलीप कुमार को ही फ़िल्म ‘दाग’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार‍ दिया गया था। अपने जीवनकाल में दिलीप कुमार कुल 8 बार फ़िल्म फेयर से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार पा चुके हैं और यह एक ऐसा कीर्तिमान है जिसे अभी तक तोड़ा नहीं जा सका है। हलाकि, शाहरुख़ ख़ान ने 8 फ़िल्मफेयर अवार्ड जीतकर उनकी बराबरी ज़रूर कर ली है। जबकि शाहरुख़ को दिलीप कुमार अपना बेटा मानते हैं।

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