कानून का शासन भारतीय लोकतंत्र की प्रामाणिकता : राष्ट्रपति

Apr 08, 2016

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को कहा कि भारतीय लोकतंत्र ‘संविधानवाद’ की इमारत पर अटल और अडिग खड़ा है और कानून का शासन देश के लोकतंत्र की प्रामाणिकता (हॉलमार्क) है.

राष्ट्रपति ने उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के 2296 फैसलों को समाहित करने वाले पुस्तक के विमोचन के अवसर पर यह बात कही.

उन्होंने कहा कि कानून का शासन भारतीय लोकतंत्र की प्रामाणिकता है, जिसके कारण प्रत्येक भारतवासी खुद को सशक्त समझता है. संविधान आधारित कानून का शासन ही प्रत्येक देशवासी को राष्ट्रनिर्माण में पूरे जोश और उत्साह से हिस्सा लेता है.

उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोविन्द गोयल लिखित ‘स्टेटमेंट ऑफ इंडियन लॉ : सुप्रीम कोर्ट थ्रू इट्स कंस्टीट्यूशन बेंच डिसीजन सिंस 1950’ नामक पुस्तक का विमोचन किया. विमोचन के बाद पुस्तक की एक प्रति श्री मुखर्जी को सौंपी गई.

राष्ट्रपति ने त्वरित न्याय पर बल देते हुए कहा कि देश का हर नागरिक संविधान के दायरे में वाजिब न्याय पाने का हकदार है और जरूरतमंदों को किफायती एवं समय से न्याय दिलाना एक मात्र लक्ष्य होना चाहिए.

इस मौके पर न्यायमूर्ति ठाकुर और जाने माने कानूनविद फली एस नरीमन ने भी अपने विचार व्यक्त किये.

 

 

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