10 फुट गहरी बर्फ में मां के शव को कंधे पर ले जाने को मजबूर सेना का जवान अब्बास, सरकार ने नहीं की मदद

Feb 03, 2017
10 फुट गहरी बर्फ में मां के शव को कंधे पर ले जाने को मजबूर सेना का जवान अब्बास, सरकार ने नहीं की मदद

श्रीनगर में सेना और सरकार की सहायता न मिलने के कारण भारतीय सेना का जवान मोहम्मद अब्बास खान की मां के शव को अंतिम संस्कार के लिए पांच दिन का इंतजार करना पड़ा. लगभग 8 लोगों की एक टीम ने अब्बास खान की मां के शव को लेकर 70 किलोमीटर पैदल तय किए। इस जवान की मां की मौत पठानकोट में 28 जनवरी को हो गई थी. बेटे की इच्छा थी कि वह अपनी मां का शव अपने गांव LOC के करीब कश्मीर के करनाह में दफनाए।

इधर अब्बास मां का शव लेकर श्रीनगर से कुपवाड़ा पुहंच चुके थे. उन्हें उम्मीद थी कि सेना शव को चित्राकोट, जो उनके घर से 52 किलोमीटर दूर है, तक पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर दे देगी, लेकिन सेना की मदद नहीं आई। अब्बास ने स्थानीय प्रशासन से भी हेलीकॉप्टर की मांग की, लेकिन यहां भी सिर्फ आश्वासन ही मिला। अब्बास की मां सकीना बेगम ने हृदय घात की वजह से 29 जनवरी को पठानकोट के आर्मी अस्पताल में दुनिया को अलविदा कह दिया था। वो अपने परिवार के साथ कारनाह के एक गांव चित्रकूट में रहती थीं। वह अपने बेटे के साथ पिछले तीन महीनों से यहां रह रही थी। जब उनकी मौत हुई तो सेना के अफसरों ने उनके बेटे को भरोसा दिया कि वो हर संभव मदद करेंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

इसके बाद जवान अपनी पत्नी के साथ अपनी मां के शव को उठाकर चौकीबल तक लाया जहां उन्होंने 4 दिन गुजारे। वहां के स्थानीय लोगों से अब्बास की काफी मदद की। प्रशासन से संपर्क करने की हर संभव कोशिश करने के बाद चौकीबल के लोगों ने अब्बास की मां के शव को अपने कंधे पर उठा 70 किलोमीटर का सफर तय करके उनके गृहनगर तक पहुंचाया। इस तरह जाके अब्बास ने अंत में अपनी मां को अपने गांव में दफनाने की अपनी इच्छा पूरी की।

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