उस भगवान का ही दलितों को बहिष्कार कर देना चाहिए , जो उन्हें अछूत बनाता हो

Jun 27, 2016

देहरादून के जौनसार इलाके में दलितों के मन्दिर प्रवेश को लेकर जो हिंसा हुयी है , उसकी श्लाघा तो कोई नहीं कर सकता , लेकिन अभी यह साफ़ नहीं है कि इस प्रकरण में भाजपा सांसद तरुण विजय पर हमला हुआ है , या उनकी पिटाई हुयी है । हमला पूर्व नियोजित और संगठित तरीके से किया जाता है , जबकि पिटाई आकस्मिक और चिढ़ाये जाने के कारण होती है । मुझे दूसरी स्थिति के आसार अधिक लग रहे हैं ।

जौनसार के ख़ास मन्दिरों में दलितों के साथ भेद भाव की परम्परा कोई 4 साल पुरानी नहीं , अपितु सदियों से है । पाँच साल पूर्व जब प्रदेश में भाजपा सरकार थी , तब भी तरुण विजय या किसी अन्य भाजपाई के मन में दलितों के प्रति यह टीस उठी हो , ऐसा मेरी जानकारी में नहीं है। इस तरह मुझे पूर्ण विश्वास है कि यदि 2017 में प्रदेश में भाजपा सरकार बनी , तो यही मुद्दा लेकर कांग्रेसी वहां यही सब कुछ करते मिलेंगे ।
राजनितिक लोग किसी पवित्र उद्देश्य को भी अपनी राजनितिक आकांक्षा के कारण दूषित कर देते है । सन् 50 से 60 के बीच उत्तराखण्ड के सर्वोदयी भी दलितों के मन्दिर प्रवेश का अभियान बगैर किसी हंगामे के , बड़े पैमाने पर चला चुके हैं , क्योंकि उनके इस कृत्य के पीछे कोई राजनितिक महत्वाकांक्षा नहीं थी । बहरहाल , मेरा मानना है कि दलितों को बाबा साहेब आम्बेडकर की तर्ज़ पर उस भगवान का ही बहिष्कार कर देना चाहिए , जो उन्हें अछूत बनाता हो । ये तमाम मन्दिर दलितों पर शोषण के लिए ही स्थापित किये गए हैं , फिर उनमे प्रवेश की कैसी ज़िद ?

अन्य ख़बरों से लगातार अपडेट रहने के लिए हमारे Facebook पेज को Join करे

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

Jan 19, 2018

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>