आतंक का ‘पोषण’ हो रहा है, भारत के पड़ोस में : मोदी

Jun 09, 2016

पाकिस्तान को स्वाभाविक रूप से ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि ‘भारत के पड़ोस में आतंकवाद का पोषण’ हो रहा है. प्रधानमंत्री ने बिना कोई विभेद किये लश्कर ए तैयबा, तालिबान और आईएसआईएस जैसे आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करने पर जोर दिया जो ‘घृणा, हत्या और मौत की विचारधारा साझा’ करते हैं. अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ‘एक स्वर’ में लड़ाई लड़ी जानी चाहिए, साथ ही उन्होंने राजनीतिक फायदे के लिए आतंकवाद को बढावा देने और उसका अनुपालन करने वालों को पुरस्कृत करने से इंकार करके अमेरिकी संसद द्वारा स्पष्ट संदेश देने की सराहना की. उनका आशय प्रत्यक्षत: पाकिस्तान को आठ एफ.16 लड़ाकू विमानों की बिक्री का मार्ग अवरूद्ध करने की घटना से था. अपने 45 मिनट के भाषण में उन्होंने भारत और अमेरिका के बढते संबंधों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण आयामों की चर्चा की जिसमें विशेष तौर पर असैन्य परमाणु सहयोग शामिल है. प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को ‘अतीत के बाधाओं’ को पीछे छोड़ना चाहिए क्योंकि ‘भविष्य का आधार ठोस’ बन चुका है. अपने चिर परिचित सफेद कुर्ता पायजामा और स्लेटी रंग की जैकेट पहने मोदी का अमेरिकी सांसदों ने गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके संबोधन के दौरान बीच बीच में 40 से अधिक बार तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया और कई बार खड़े होकर गर्मजोशी भरा भाव प्रकट किया. जब 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया था तब उनके भाषण के दौरान 33 बार तालियां बजी थीं. तत्कालीन प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने यह बात बतायी. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका विश्व शांति और समृद्धि की परिदृष्टि को साझा करते हैं. उन्होंने कहा कि पूरे विश्व के समक्ष आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है और इससे कई स्तरों पर लड़ा जाना चाहिए क्योंकि पारंपरिक सैन्य, खुफिया या कूटनीतिक उपाय अकेले इन्हें परास्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है. मोदी ने कहा, ‘‘भारत की पश्चिमी सीमा से अफ्रीका तक यह अलग अलग नामों से है.. यह लश्कर ए तैयबा से तालिबान और फिर आईएसआईएस के अलग अलग नामों से हैं. लेकिन इनकी विचारधारा एक है, यह घृणा, हत्या और हिंसा की.’’ पाकिस्तान के परोक्ष संदर्भ में मोदी ने कहा, ‘‘हालांकि इसकी छाया पूरी दुनिया में फैली है और इसका भारत के पड़ोस से पोषण हो रहा है.’’ उन्होंने कहा कि जो लोग मानवता में विश्वास करते हैं, उन्हें आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साथ आना चाहिए और इस बुराई के खिलाफ एक स्वर में बोलना चाहिए. मोदी ने कहा, ‘‘मैं राजनीतिक फायदे के लिए आतंकवाद को बढ़ावा देने और अनुपालन करने वालों को स्पष्ट संदेश देने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों का स्वागत करता हूं.’’ उन्होंने साथ ही कहा कि उन्हें पुरस्कृत करने से इंकार करना ऐसे कायरे के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराने की दिशा में पहला कदम है. स्पष्ट तौर पर उनका संकेत हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पाकिस्तान को आठ एफ.16 विमानों की बिक्री का मार्ग अवरूद्ध करने की ओर था. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद को अवैध घोषित किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘वक्त की जरूरत है कि हम हमारे सुरक्षा सहयोग को और गहरा बनायें.’’ मोदी ने कहा कि हमारा सहयोग ऐसी नीतियों पर आधारित होना चाहिए जो आतंकवादियों को पनाह देने वालों, उनका समर्थन करने वालों और प्रायोजित करने वालों को अलग थलग करता हो. प्रधानमंत्री ने कहा कि वह अच्छे और बुरे आतंकवादियों में विभेद नहीं करता हो और धर्म को आतंकवाद से अलग रखता हो. प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने नागरिकों और सैनिकों को खोया है, साथ ही इस बात को रेखांकित किया कि किस प्रकार से 2008 के मुम्बई आतंकी हमले के बाद अमेरिका भारत के साथ खड़ा रहा था. भारत-अमेरिकी संबंध को गतिशील भविष्य का आधार बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच गठजोड़ एशिया से अफ्रीका और हिन्द महासागर से प्रशांत महासागर तक शांति, समृद्धि और स्थिरता का वाहक बन सकता है. उन्होंने कहा कि यह गठजोड़ वाणिज्य के समुद्री मार्ग और सागरों में नौवहन स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत हिन्द महासागर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के संदर्भ में उन्होंने कहा कि हमारा सहयोग और प्रभावी हो सकता है अगर अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं 20वीं सदी की सोच से आगे बढ़कर आज की हकीकत को प्रदर्शित करें. मोदी ने अपने संबोधन में मार्टिन लूथर किंग, महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद और अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र  किया और कहा कि भारत और अमेरिकी दुनिया के सबसे बड़े और पुराने लोकतंत्र हैं और हमें एक दूसरे के दर्शन और अनुभवों से काफी सीखने की जरूरत है ताकि नैसर्गिक सहयोगी बनें. मोदी ने कहा, ‘‘जब हम अपने गठजोड़ को गहरा बना रहे हैं, ऐसे में कई बार एक दूसरे से अलग विचार सामने आ सकते हैं. लेकिन चूंकि हमारे हित और चिंताएं मिलती हैं, ऐसे में निर्णय करने और हमारे सोच में विविधता को स्वायत्ता हमारे गठजोड़ को और मूल्यवान बना सकता है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए जब हम एक नयी यात्रा पर निकल रहे हैं और नये लक्ष्य निर्धारित कर रहे हैं तब हमें केवल नियमित बातों पर ध्यान देने से आगे बढ़ते हुए बदलावकारी विचारों पर ध्यान देना चाहिए.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि विचार केवल धन सृजित करने पर नहीं बल्कि हमारे समाज के लिए मूल्य सृजित करने पर केंद्रीत होने चाहिए, केवल तात्कालिक फायदे के लिए नही बल्कि दीर्घकालिक लाभ के लिए हो, केवल हमारे सर्वश्रेष्ठ कायरे पर ही नहीं बल्कि गठजोड़ को आकार प्रदान करने के लिए हो और केवल हमारे लोगों के उज्जवल भविष्य के लिए ही नहीं बल्कि और एकजुट, मानवीय और समृद्ध दुनिया के लिए सेतु के निर्माण के लिए भी हो. मोदी ने कहा, ‘‘और हमारी यात्रा की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है कि हम नये नजरीये और नयी संवेदनाओं के लिए देखें. जब हम ऐसा करेंगे तब हम अपने अभूतपूर्व संबंधों की पूर्ण वास्तविकता को समझेंगे.’’ मोदी ने भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड का यह कहते हुए बचाव किया कि उनकी सरकार के लिए संविधान ‘वास्तविक पवित्र ग्रंथ’ है, जो सभी नागरिकों को आस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, भले ही उनकी कोई भी पृष्ठभूमि हो. अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘भारत एकजुट होकर रहता है, भारत एकजुट होकर आगे बढता है और भारत एक होकर जश्न मनाता है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरी सरकार के लिए संविधान ही वास्तविक पवित्र ग्रंथ है. और उस पवित्र पुस्तक में आस्था की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति और मताधिकार और सभी नागरिकों के लिए समानता का अधिकार मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया गया है.’’ इस अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक में उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने भी हिस्सा लिया. उनका बयान यूएस कमीशन फॉर इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम के वाषिर्क रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें दावा किया गया था कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता 2015 में नकारात्मक रास्ते पर थी क्योंकि धार्मिक सहिष्णुता में गिरावट आई है और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन में वृद्धि हुई है. भारत की आर्थिक वृद्धि दर के 7.6 प्रतिशत होने और अपार अवसरों का जिक्र  करते हुए मोदी ने कहा कि हर क्षेत्र में भारत आगे बढ़ रहा है और मैं इसमें अमेरिका को अटूट सहयोगी के रूप में देख रहा हूं. उन्होंने कहा कि कई अमेरिकी यह मानते हैं कि एक मजबूत और समृद्ध भारत, अमेरिका के सामरिक हित में है. ‘‘हमें साझे विचारों को व्यवहारिक सहयोग में बदलने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए. इस बात में कोई शंका नहीं है कि हमारे संबंधों को आगे बढ़ाने से दोनों देशों को फायदा होगा.’’ मोदी ने कहा कि अमेरिकी कारोबार आर्थिक वृद्धि के नये क्षेत्रों की तलाश कर रहे हैं, ऐसे में उनके उत्पादों के लिए बाजार, काफी संख्या में कुशल संशाधन और उत्पादन के वैश्विक स्थान की दृष्टि से भारत आदर्श सहयोगी हो सकता है. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान हरित क्रांति और खाद्य सुरक्षा में नोरमन बोरलॉग के योगदान का भी जिक्र  किया. अमेरिका के साथ सहयोग का जिक्र  करते हुए मोदी ने कहा कि हम किसी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ ज्यादा कारोबार करते है. और उत्पादों, सेवाओं के प्रवाह से हमारे समाज में नौकरियों का सृजन होता है. मोदी ने कहा, ‘‘हमारा सहयोग आतंकवादियों से हमारे शहरों, हमारे नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करते हैं, हमारे आधारभूत संरचना को साइबर खतरों से सुरक्षित बनाते हैं. असैन्य परमाणु सहयोग, जैसा कि कल राष्ट्रपति ओबामा ने बताया कि यह हकीकत है.’’ उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में काफी अवसर आये हैं और इसके साथ ही चुनौतियां भी आई है. इस संदर्भ में एक दूसरे पर हमारी निर्भरता भी बढ़ी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सहमत सुरक्षा ढांचे के अभाव में अनिश्चितता उभरी है. आतंक का खतरा बढ़ रहा है और साइबर और बाहरी दुनियर से…

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