एसवाईएल नहर विवाद गहराया, दिल्ली के भी जुड़ने के आसार

Mar 18, 2016

सतलुज यमुना संपर्क (एसवाईएल) नहर से जुड़ा विवाद गुरुवार को और गहरा हो गया तथा हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी इनेलोद और पंजाब के कांग्रेस विधायकों ने एक दूसरे की विधानसभाओं में घुसने का प्रयास किया.

वहीं इस विवाद से दिल्ली के भी जुड़ने के आसार पैदा हो गए हैं जिसके मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने नहर के निर्माण का विरोध किया है.

विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला और इनेलोद की राज्य शाखा के अध्यक्ष अशोक अरोड़ा के नेतृत्व में पार्टी के विधायकों ने पंजाब विधानसभा के द्वार पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. इस समय पंजाब विधानसभा का सत्र चल रहा है. वे एसवाईएल नहर के निर्माण के लिए अधिग्रहित 3,928 एकड़ भूमि को उनके वास्तविक मालिकों को सौंपने संबंधी विधेयक पंजाब विधानसभा द्वारा पारित किये जाने का विरोध कर रहे थे.

इस कदम की जवाबी कार्रवाई में कांग्रेस विधायकों ने हरियाणा विधानसभा में घुसने का प्रयास किया लेकिन वाच एंड वार्ड के कर्मियों ने उन्हें रोक दिया.

इनेलोद विधायकों का प्रदर्शन जहां काफी समय तक चला वहीं पंजाब के कांग्रेस विधायकों का प्रदर्शन थोडी देर ही चला.  पंजाब विधानसभा के बाहर इनेलोद विधायकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच झड़प हुई.

पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ में एक ही परिसर में दोनों राज्यों की विधानसभाएं स्थित हैं.

प्रश्नकाल के बाद इनलोद विधायक हरियाणा विधानसभा से निकलकर पंजाब विधानसभा की ओर चले गए और दोनों राज्यों की सरकार के विरोध में नारेबाजी की और ‘‘असंवैधानिक’’ विधेयक वापस लिये जाने की मांग की.

बाद में संवाददाताओं से बातचीत में चौटाला ने कहा, ‘‘हमने पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष चरनजीत सिंह अटवाल से परिसर स्थित उनके कमरे में मुलाकात की और सदन द्वारा उक्त विधेयक को पारित किए जाने पर अपना विरोध दर्ज कराया.’’

चौटाला ने कहा, ‘‘इस विधेयक के पारित होने से दोनों राज्यों के बीच नई लड़ाई शुरू हो जाएगी. हमने पंजाब को अपने बड़े भाई की तरह समझा लेकिन आज उन्होंने हमें धोखा दिया.’’

उन्होंने कहा, ‘‘हरियाणा के लोगों का अब पंजाब पर भरोसा नहीं रहा..उन्होंने दो राज्यों के बीच के संबंध को समाप्त कर दिया है.’’

चौटाला ने इस स्थिति को हरियाणा के इतिहास का ‘काला अध्याय’ करार दिया और कहा कि उनकी पार्टी इस लड़ाई को अंत तक लड़ती रहेगी.’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि जरूरत होगी, तो इनेलोद अपने कार्यकर्ताओं को इस बात के लिए तैयार करेगी कि वे पंजाब की सीमा के भीतर जाकर निर्माणाधीन एसवाईएल नहर की समतल की गई भूमि की फिर से खुदाई करें.’’

उधर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि एसवाईएल नहर मुद्दे पर पंजाब के ‘‘असंवैधानिक’’ कदम को लेकर हरियाणा सरकार ने रोष जताया है और उनकी सरकार ने एसवाईएल के लिए पंजाब सरकार द्वारा कल भेजे गए 191.75 करोड़ रूपए के चेक को लौटा दिया है.

पंजाब कैबिनेट ने मंगलवार को हरियाणा को 191.75 करोड़ रूपए का चेक भेजने का फैसला किया था. हरियाणा ने एसवाईएल नहर के निर्माण पर यह राशि खर्च की है.

खट्टर ने हरियाणा विधानसभा में एक बयान में कहा कि एसवाईएल नहर से संबंधित विधेयक पर राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने अभी तक दस्तखत नहीं किए हैं.

इस बीच हरियाणा के दो मंत्रियों ओ पी धनकड़ (कृषि) और कैप्टन अभिमन्यु (वित्त) ने एसवाईएल नहर मुद्दे पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के हालिया बयानों को लेकर उन पर निशाना साधा.

उधर दोनों राज्यों के बीच विवाद और गहरा होने के बीच इनेलोद ने शिरोमणि अकाली दल से अपने दशकों पुराने संबंध तोड़ लिए.

पार्टी नेता अभय चौटाला ने कहा, ‘‘अकालियों के साथ पार्टी के संबंध अब समाप्त हो गए हैं क्योंकि वे हरियाणा के हितों के खिलाफ एक विधेयक लाये हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा पंजाब में शिअद के साथ कोई संबंध नहीं है.’’

उधर पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से कहा कि नहर मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के आलोक में राज्य के हितों की हर स्तर पर रक्षा की जानी चाहिए.

वरिष्ठ कांगेस नेता ने कहा कि बादल को देश में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ कानूनी विशेषज्ञों के साथ उच्चतम न्यायालय में इस मामले में पैरवी करनी चाहिए.

 

 

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