सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने कहा: देश की आज़ादी में मुसलमानों की क़ुरबानी को नकार नहीं सकते

Aug 19, 2017
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने कहा: देश की आज़ादी में मुसलमानों की क़ुरबानी को नकार नहीं सकते

सुप्रीम कोर्ट में आयोजित ‘स्वतंत्रता दिवस’ के 71वें समारोह में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बहुत सारी बातों के के बारे में बात की लेकिन, उससे पहले उन्होंने अपने भाषण की शुरूआत इस सवाल के साथ किया कि, ‘क्या आपने कभी अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले “अब्दुल्लाह’‘ का नाम सुना है? ये सवाल करने के बाद जस्टिस जेएस खेहर ने खुद ही इसका जवाब देते हुए कहा कि, ‘अब्दुल्लाह एक मुस्लिम जांबाज़ थे’

उन्होंने कहा कि वह अब्दुल्लाह ही थे, जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य की भेदभावपूर्ण नीतियों का विरोध करते हुए 28 सितम्बर 1871 को कोलकता में हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जान पेकिंस्टन नारमन को चाक़ू मारकर उसको घायल कर दिया था। जिसके बाद अगले ही दिन उस अंग्रेज़ न्यायाधीश की मौत हो गई। उन्होंने उल्लेख किया कि अतिक्रमणकारी मुख्य न्यायाधीश पर हमले के बाद ‘अब्दुल्लाह’ डर की वजह से भागे नहीं, बल्कि इस जांबाज़ की हिम्मत तो देखो कि उन्होंने ख़ुद ही अपने आपको पुलिस के हवाले कर दिया। खेहर ने आगे कहा कि वह एक मुसलमान थे और अंग्रेज़ों की अन्यायपूर्ण नीतियों के मुखर विरोधी थे।

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‘अब्दुल्लाह’ के इस घटना के बाद भारत में ब्रिटेन के गर्वनर जनरल ने ये एलान कर दिया था। कि अब वह एक भी मुसलमान को ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे। लेकिन 4 फ़रवरी 1872 को अंग्रेज़ गर्वनर जनरल को एक और मुस्लिम “शेर अली आफ़रीदी “ नामक ने उस पर चाक़ू से हमला करके हत्या कर दी। खेहर ने कहा ‘लेकिन आज भारत में कितने लोग अंग्रेज़ गर्वरन जनरल की हत्या करने वाले के बारे में जानते हैं~???’ सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि देश की स्वतंत्रा में मुसलमानों की भूमिका के महत्व को कम नहीं किया जा सकता। इतिहास इसका गवाह है।

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