सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला-हर गुनाह के लिए अलग अलग उम्रकैद की सजा नहीं होनी चाहिए

Jul 19, 2016

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने उम्रकैद की सजा पर मंगलवार को एक अहम फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि अगर किसी शख्स को एक से अधि‍क धाराओं में उम्रकैद की सजा मिली है तो ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. अदालत ने साफ किया कि यह नहीं हो सकता कि वो हर अपराध के लिए अलग-अलग उम्रकैद काटे.

सर्वोच्च अदालत ने इसके साथ ही इस दलील को भी स्वीकार कर लिया कि जीवन एक ही होने की वजह से एक से ज्यादा उम्रकैद की सजा का आदेश देना सही नहीं है. हालांकि, कोर्ट ने ये भी कहा है कि अगर उम्रकैद के साथ किसी दूसरी धारा में कम सजा सुनाई गई है तो उनका साथ चलना जरूरी नहीं है. कोर्ट ने कहा, ‘फैसला सुनाने वाले जज चाहें तो पहले कम सजा के लिए जेल में रहने के बाद दोषी को उम्रकैद का आदेश दे सकते हैं.’

16 दोषि‍यों को 8 उम्रकैद की सजा

बता दें कि कोर्ट में तमिलनाडु के मुथुरामलिंगम समेत उसके परिवार के 16 सदस्यों का मामला चल रहा था. इन सभी को मुथुरामलिंगम की पत्नी और 7 रिश्तेदारों की हत्या के मामले में कुल 8 उम्रकैद की सजा दी गई थी. यानी हर हत्या के लिए 1 उम्रकैद. इसके अलावा सभी को हत्या के प्रयास के लिए 10-10 साल की सजा भी सुनाई गई थी. मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने सभी सजाएं अलग-अलग काटने का आदेश दिए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि इस फैसले के बाद भी मुथुरामलिंगम और बाकी 15 दोषियों को पहले 10 साल की सजा काटने के बाद उम्रकैद की सजा भोगनी होगी. इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उम्रकैद की सजा देते वक्त जज पूरी उम्र जेल में रहने का आदेश दे सकते हैं. यदि वो चाहें तो सजा की मियाद 14 साल से ज्यादा रख सकते हैं.

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