अजीब रिवाज- शादी होने पर लड़कियां नहीं जाते हैं लड़के ससुराल

Apr 04, 2017
अजीब रिवाज- शादी होने पर लड़कियां नहीं जाते हैं लड़के ससुराल

हमारे देश में ऐसे बहुत से जनजाति हैं जहां पर बहुत ही अजीबोगरीब रीति रिवाज है। बहुत सारे रिवाज़ तो ऐसे हैं जिन्हें सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। आज हम ऐसे ही एक जनजाति की बात करने जा रहे हैं।

 यह जनजाती है खासी– यह जनजाति मेघालय की जनजाति है। खांसी जाति के लोग महिला प्रधान लोग हैं। जिससे तरह पूरे भारत में पुरुष प्रधान समाज चलता है उसी तरह मेघालय की खासी जाति में महिला प्रधान समाज है। इस जनजाति में मां बाप की प्रॉपर्टी लड़कों को नहीं बल्कि बड़ी लड़की को दी जाती है। इतना ही नहीं इस यहां पर शादी होने पर लड़कियां नहीं बल्कि लड़के ससुराल जाते हैं।

इस जनजाति में हर वह अधिकार जो पुरुषों के होते हैं वह महिलाओं के है। इतना ही नहीं है यहां पर सारा कारोबार महिलाओं द्वारा संभाला जाता है। बच्चों का नाम मां के नाम पर होता है। अर्थात बच्चों का सरनेम मां के नाम पर होता है। यहां पर लड़कियों के पैदा होने पर बहुत जशन मनाया जाता है जबकि लड़कों के पैदा होने पर कुछ ज्यादा खुशी नहीं मनाई जाती। छोटी बेटी को यहां पर खातडूह कहा जाता है। छोटी बेटी ही सारे परिवार की जिम्मेदारी संभालती है और सारी प्रॉपर्टी खातडूह के नाम पर ही कर दी जाती है।

यहां पर लड़कियां बचपन से ही गुड़िया नहीं बल्कि जानवरों की हड्डियों से खेलती हैं। और वह जानवरों की हड्डियों के ही मालाएं पहनती हैं। वे ज्यादातर जानवरों की हड्डियों के ही गहने पहनती हैं। जिस तरह से पूरे भारत में यह मांग है कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दिए जाए उसी तरह जनजाति में यह मांग की जा रही है कि पुरुषों को भी महिलाओं के बराबर स्थान दिया जाए। वे यह नहीं कहते कि महिलाओं के अधिकार को कम करो पर वह यह जरूर कहते हैं कि उन्हें भी कुछ अधिकार दिए जाएं।

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