एनजीटी ने श्री श्री रविशंकर के सांस्कृतिक महोत्सव को दी हरी झंडी

Mar 09, 2016

एनजीटी ने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग को यमुना नदी किनारे विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन के लिए सशर्त मंजूरी दे दी है.
मंजूरी देने के साथ ही राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने उस पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया.

न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने महोत्सव के आयोजन के लिए नियामक मंजूरी देने में गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाने के लिए दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति पर एक लाख रुपए और डीडीए पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश भी दिया.

एनजीटी ने महोत्सव के आयोजन में पर्यावरण नियमों का खुलेआम उल्लघंन का आरोप लगाते हुए इस पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया. एनजीटी में यह याचिका ‘यमुना जिए अभियान’ नाम की एक संस्था की ओर से दायर की गई थी.

एनजीटी ने ऑर्ट ऑफ लिविंग फॉउंडेशन पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना पर्यावरण क्षति पूर्ति के तौर पर लगाया है. उसने कहा है कि यमुना के जल ग्रहण क्षेत्र में इस तरह के आयोजन से नदी की पारिस्थितिकी को बहुत नुकसान पहुंचेगा ऐसे में इसकी जिम्मेदारी फाउंडेशन को ही वहन करनी होगी. इसके साथ ही उसने इस मामले में गैर जिम्मेदार रवैया अपनाने के लिए डीडीए पर पांच लाख रुपए और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर एक लाख का जुर्माना लगाने का आदेश भी सुनाया.

एनजीटी ने आयेजन पर रोक की मांग वाली ‘यमुना जिए’ के मनोज मिश्रा की याचिका पर वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी देखने वाली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एजेंसियों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था.

इन सभी पक्षों ने अदालत के समक्ष पेश हलफनामें में समारोह के आयेजन को मंजूरी देने के अपने अधिकार क्षेत्र पर अलग-अलग तर्क पेश किए. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने कहा कि उसने आयोजन के लिए कोई मंजूरी नहीं दी थी. डीडीए ने आयेजन का समर्थन किया लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि यह इतने बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. जल संसाधन मंत्रालय ने कहा कि उसने इस तरह की कोई मंजूरी नहीं दी. जबकि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का जवाब था कि उससे कोई मंजूरी मांगी ही नहीं गई थी. दिल्ली सरकार ने कहा कि इस आयोजन के लिए पुलिस और अग्निशमन विभाग से कोई मंजूरी नहीं ली गई.

एनजीटी ने तमाम पक्षों की ओर से पेश इस दलील पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘आपलोग हमारे सब्र का इम्तहान नहीं लें’’. उसने कहा कि सभी ने एक ही जवाब तैयार कर लिया है कि ‘हमें नहीं पता’. सब अपना पल्ला झाड़ रहे हैं.’

अदालत ने इस मामले में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की खिंचाई करते हुए कहा कि क्या उसे नहीं लगता कि ऐसे बड़े आयोजन के मामले में उससे मंजूरी ली जानी चाहिए थी. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर भी खास नाराजगी जताते हुए एनजीटी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालने वाली इकाई के तौर पर, ‘‘आपकी क्या जिम्मेदारी बनती है. क्या आपने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए इतने बडे अस्थायी ढ़ांचे का निर्माण पहले कभी देखा है. क्या आपको इससे यमुना नदी पर पड़ने वाले प्रभाव का आंकलन नहीं करना चाहिए था.’’
इस बीच ऑर्ट ऑफ लिविंग ने महोत्सव के आयोजन को लेकर उठ रहे विवाद पर एनजीटी में दी गई अपनी दलील में कहा कि समारोह के लिए सभी नियामक मंजूरी ले ली गई है और इस आयेजन से युमना की पारिस्थितिकी को कोई नुकसान नहीं होगा. एनजीटी ने इस तर्क को स्वीकार नहीं करते हुए नदी के पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के लिए उस पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना ठोंक दिया.

एनजीटी ने कहा है कि यमुना नदी के पानी से उठने वाली बदबू को खत्म करने के लिए आयोजकों की ओर से उसमें गिरने वाले नालों में हजारों लीटर जो इको एन्जाइम डाला जाने वाला है उसकी जांच भी नहीं की गई है. ऐसे में इस एन्जाइम से यमुना के जल पर क्या असर पड़ेगा इसकी जिम्मेदारी आयोजको को ही लेनी होगी.

एनजीटी ने आयोजकों की ओर से महोत्सव पर कुल 25 करोड़ 63 लाख रुपए खर्च किए जाने का ब्यौरा देने पर भी तल्ख टिप्पणी की और कहा, ‘‘आप एक आयेजन पर इतना पैसा खर्च कर सकते हैं तो फिर आपको बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं का काम संभाल लेना चाहिए.’’

इस बीच लोक निर्माण विभाग की ओर से अदालत में यह खुलासा करने पर कि नदी किनारे सात एकड़ क्षेत्र में बनाया जाने वाला विशाल मंच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए सुरक्षित नहीं है अदालत ने इस बारे में आयोजकों से सवाल किया. उनके इस जवाब पर कि यह मिट्टी पर बनाया जा रहा है एनजीटी ने कहा कि जहां इसे बनाया गया है वहां मिट्टी तो है ही नहीं ऐसे में यह चालीस फुट ऊंचा मंच बालू पर ही बनाया जा रहा होगा, जो निश्चित रुप से सुरक्षित नहीं हो सकता.

पर्यावरणविदों का कहना है कि इस व्यापक आयेजन से यमुना की नाजुक स्थिति को गंभीर नुकसान हो सकता है और इससे यमुना को अपूरणीय क्षति हो सकती है. हालांकि आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रवि शंकर ने इन सभी आरोपों को नकारा है और लोगों से इस मामले में राजनीति नहीं करने की अपील करते हुए कहा है कि यह सभी धर्मों,समुदायों और लोगों को एक साथ लाने का प्रयास है जिसमें सबसे सहयोग की अपील की जाती है.

इस बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस कार्यक्रम में शिरकत करने से इनकार कर दिया है. माना जा रहा है कि यह फैसला उन्होंने आयोजन के स्थान को लेकर लगातार उठ रहे विवाद को देखते हुए ही लिया है. इस बीच कार्यक्रम के आयोजन को लेकर बुधवार को संसद के दोनों सदनों में भी खासा हंगामा हुआ.

आर्ट ऑफ लिविंग की स्थापना के 35 वर्ष पूरे होने के अवसर 11 मार्च से तीन दिनों तक चलने वाले इस विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में देश-विदेश से 35 हजार कलाकारों के भाग लेने की संभावना है. इसके अलावा कार्यक्रम में 155 देशों से 35 लाख लोगों के आने की भी उम्मीद है. ऐसी खबर है कि समारोह का उद्घाटन प्रधानमंत्री करने वाले हैं.

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